अयोध्या सीट पर सीधी भिड़ंत! सीएम योगी ने अखिलेश यादव को दी चुनाव लड़ने की खुली चुनौती

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर दिग्गजों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव अब आमने-सामने हैं। मामला अयोध्या विधानसभा सीट से जुड़ा है, जहां मुख्यमंत्री ने अखिलेश यादव को सीधे मुकाबले के लिए ललकारा है।
शनिवार को बलरामपुर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद आक्रामक अंदाज में कहा कि अखिलेश यादव को उनके शिष्यों के जरिए चुनाव लड़ने के बजाय खुद मैदान में उतरना चाहिए। उन्होंने कहा, "अखिलेश जी, आप भी लड़िए और मैं भी लड़ूंगा। आप अपना नामांकन भरिए, मैं भी भरूंगा। आइए, अपनी किस्मत आजमाते हैं।" मुख्यमंत्री का यह बयान सीधे तौर पर एक 'फेस-ऑफ' की चुनौती है, जिसने प्रदेश के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है।
सोशल मीडिया पर अखिलेश का पलटवार
मुख्यमंत्री के इस बयान के करीब एक घंटे बाद ही अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपनी प्रतिक्रिया दी। हालांकि उन्होंने योगी आदित्यनाथ का नाम नहीं लिया, लेकिन तंज कसते हुए लिखा कि "चंदा चुराने वालों को हराने के लिए हमारा एक युवा 'PDA गार्ड' ही काफी है।" उन्होंने आगे कहा कि जो चोरों को क्लीन चिट देते हैं, वे उनके साझेदार हैं और इस बार जनता उनका अहंकार तोड़ देगी। अखिलेश ने लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए यह संकेत दिया कि जनता ने पहले ही अपना फैसला सुना दिया है।
इस पूरे विवाद की शुरुआत गुरुवार, 8 अक्टूबर को हुई थी, जब अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री को चुनौती दी थी कि अगर उन्हें अपने दावों पर भरोसा है, तो वे अयोध्या से चुनाव लड़ें। अखिलेश ने यह भी आरोप लगाया था कि धर्म और धन की चोरी करने वालों को जनता नहीं बख्शेगी।
वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सपा के नेता माफियाओं के सामने झुकने और उनकी मजारों पर प्रार्थना करने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने सपा नेताओं की स्थिति की तुलना एक कहावत से करते हुए कहा कि "हताश बिल्ली खंभे को खुरचती है।" जब अयोध्या में उनके बार-बार जाने पर सवाल उठे, तो मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अयोध्या आस्था का केंद्र है और वहां उनका जाना केवल विकास कार्यों की निगरानी के लिए है, न कि चुनावी उद्देश्यों के लिए।