कुंडा की राजनीति में बड़ा उलटफेर: दिग्गज ब्राह्मण नेता योगेंद्र मिश्रा ने थामा सपा का दामन

Shubham Singh16 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
कुंडा की राजनीति में बड़ा उलटफेर: दिग्गज ब्राह्मण नेता योगेंद्र मिश्रा ने थामा सपा का दामन

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। प्रतापगढ़ के प्रभावशाली ब्राह्मण नेता योगेंद्र मिश्रा, जिन्हें लोग 'मौला महाराज' के नाम से जानते हैं, ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को अलविदा कह दिया है। उन्होंने गुरुवार शाम लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मौजूदगी में सपा की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान उनके साथ सैकड़ों समर्थकों का हुजूम भी पार्टी में शामिल हुआ।

योगेंद्र मिश्रा का यह कदम कुंडा और प्रयागराज की राजनीति में हलचल मचाने वाला माना जा रहा है। मिश्रा न केवल भाजपा के जिला उपाध्यक्ष रह चुके हैं, बल्कि अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के तौर पर भी उनकी मजबूत पकड़ रही है। वह क्षेत्र में राजा भैया के कड़े विरोधियों में गिने जाते हैं और पहले दो बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। साल 2002 के चुनाव में उन्होंने कुंडा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था और सीधे तौर पर रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया) को चुनौती दी थी।

भाजपा नेतृत्व पर साधा निशाना, ब्राह्मणों की अनदेखी का लगाया आरोप

सपा में शामिल होने के तुरंत बाद योगेंद्र मिश्रा ने भाजपा नेतृत्व पर तीखे हमले किए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के भीतर ब्राह्मण समुदाय की लगातार अनदेखी की जा रही है और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित किया जा रहा है। मिश्रा ने कहा कि भाजपा केवल बड़े-बड़े वादे करती है, लेकिन जब बात मेहनती नेताओं को सम्मान देने की आती है, तो उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसी असंतोष के कारण उन्होंने समाजवादी पार्टी के साथ जाने का फैसला किया।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले यह घटनाक्रम काफी अहम है। हालांकि कुंडा परंपरागत रूप से राजा भैया का गढ़ रहा है, लेकिन वहां ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या निर्णायक भूमिका निभाती है। ऐसे में योगेंद्र मिश्रा के सपा में आने से न केवल भाजपा को झटका लगा है, बल्कि राजा भैया की जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के वोट बैंक में भी सेंध लग सकती है। यह बदलाव कुंडा के चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखता है।

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