विजन इंटरनेशनल स्कूल शाहजहाँपुर में बच्चों ने धूमधाम से मनाया दशहरा, रावण दहन से दिया संदेश

Shubham Singh16 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
विजन इंटरनेशनल स्कूल शाहजहाँपुर में बच्चों ने धूमधाम से मनाया दशहरा, रावण दहन से दिया संदेश

शाहजहाँपुर के हनुमान धाम रोड स्थित विजन इंटरनेशनल स्कूल में दशहरा का पर्व बेहद भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर प्लेग्रुप से लेकर कक्षा आठ तक के छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। छोटे-छोटे बच्चों ने जब भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान का रूप धरा, तो उनकी मनमोहक प्रस्तुतियों ने सबका दिल जीत लिया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों और रावण दहन ने बांधा समां

स्कूल परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रावण के पुतले का दहन रहा, जो बुराई पर अच्छाई और झूठ पर सत्य की जीत का प्रतीक है। इस आयोजन के जरिए बच्चों को भारतीय संस्कृति और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के आदर्शों से रूबरू कराया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ददरौल विधायक अरविंद सिंह, व्यापार मंडल अध्यक्ष सचिन बाथम, स्कूल मैनेजर नवनीत कुमार रस्तोगी, वरिष्ठ पत्रकार अभिनय गुप्ता, वीआईपी ग्रुप जिला अध्यक्ष नीतू गुप्ता, मनोरमा सिंह और नवनीत सिंह मौजूद रहे। उपस्थित सभी अतिथियों और शिक्षकों ने सत्य, साहस और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

स्कूल की प्रधानाचार्या दीपमाला रस्तोगी ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि दशहरा हमें नैतिक आचरण की प्रेरणा देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बच्चों में अच्छे संस्कारों का बीजारोपण करना ही सच्ची शिक्षा है, क्योंकि आज के संस्कारी बच्चे ही भविष्य में एक बेहतर समाज का निर्माण करेंगे।

इस उत्सव में शताक्षी रस्तोगी, एंजेल, सनिध्य, सिद्धिया, अवनी गुप्ता, वैष्णवी, नायशा, बिहाना, चारु, वाणी, अवनी यादव, प्रतिष्ठा, कृतिका, बंदिता, पहल, एलिजा, ईशानी, दवा और शान्वी जैसे विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षिका अंशिका बाथम, मानसी रोहरा, चारु अग्निहोत्री, नीलम यादव, फिजा खान, फरहीन खान, अग्रिमा गुप्ता, श्रुति चौरसिया, वंशिका सक्सेना, मुक्ता माथुर, युसरा खान, चेतली गुप्ता, नैंसी बाथम, आशिफा खान और सना सिद्दीकी का विशेष योगदान रहा। अंत में यह संदेश दिया गया कि दशहरे का असली अर्थ अपने भीतर के अहंकार, क्रोध और बुराइयों को त्यागकर प्रेम, मानवता और सद्गुणों को अपनाना है।

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