मिशन शक्तिसैट: गुजरात की विपा बरिया का अंतरराष्ट्रीय स्पेस मिशन के लिए चयन, ग्रेटर नोएडा में ली ट्रेनिंग

अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में भारत की एक और बेटी ने अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है। गुजरात के महीसागर जिले के पधारा गांव की रहने वाली 16 वर्षीय विपा बरिया का चयन अंतरराष्ट्रीय 'मिशन शक्तिसैट' (Mission ShaktiSAT) के लिए किया गया है। कक्षा 11 में पढ़ने वाली विपा देश के उन चुनिंदा 20 छात्रों में शामिल हैं, जिन्हें इस महत्वाकांक्षी स्पेस पहल का हिस्सा बनने का मौका मिला है।
इस खास मिशन का आयोजन 'स्पेस किड्स इंडिया' द्वारा किया गया है, जिसकी कमान संस्थापक और सीईओ डॉ. श्रीमती केसन संभाल रही हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं को प्रेरित करना है। इस प्रोग्राम के तहत दुनिया के 108 देशों की करीब 12,000 लड़कियों को एक 12U क्यूबसैट (CubeSat) विकसित करने की प्रक्रिया से जोड़ा गया है, जिसका उपयोग संभावित चंद्र मिशन के लिए किया जा सकता है।
ग्रेटर नोएडा में मिली ट्रेनिंग और हासिल किया अवॉर्ड
अपनी इस उपलब्धि की दिशा में विपा ने उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी में आयोजित एक 10 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वर्कशॉप में हिस्सा लिया। 22 से 31 अगस्त 2026 तक चली इस ट्रेनिंग के दौरान विपा ने दुनिया भर के छात्रों के साथ मिलकर सैटेलाइट कोडिंग, डिजाइन और असेंबली का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
विपा की मेहनत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने कुल 21 मॉड्यूल और 550 सबक पूरे किए, जिसके लिए उन्हें एक विशेष अवॉर्ड और ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। यह मिशन न केवल विपा के लिए बल्कि भारत के लिए भी गर्व की बात है, क्योंकि इस महिला अंतरिक्ष शिक्षा कार्यक्रम ने सबसे अधिक राष्ट्रीयताओं के प्रतिनिधित्व का विश्व रिकॉर्ड बनाया है।
गुजरात से चुनी गई एकमात्र छात्रा विपा को उनके परिवार और मेंटोर दीपिका शर्मा का पूरा सहयोग मिल रहा है। गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी उनके इस चयन पर आधिकारिक समर्थन जताया है।
भविष्य की योजनाओं की बात करें तो विपा 26 से 28 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली में वियासैट (Viasat) द्वारा आयोजित एक स्पेस टेक्नोलॉजी इवेंट में शामिल होंगी। इसके अलावा, सैटेलाइट लॉन्च की तारीख तय होने के बाद उन्हें आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित इसरो (ISRO) केंद्र का दौरा करने का अवसर भी मिल सकता है। इस मिशन की शुरुआत 16 जनवरी 2025 को हुई थी और इसके लॉन्च की उम्मीद 2027 में की जा रही है।