वाराणसी: अजन्मी बेटियों और लावारिसों के लिए होगा विशेष श्राद्ध, गंगा घाट पर जुटेंगे लोग

वाराणसी: अजन्मी बेटियों और लावारिसों के लिए होगा विशेष श्राद्ध, गंगा घाट पर जुटेंगे लोग

धर्म और मोक्ष की नगरी वाराणसी में एक ऐसी परंपरा निभाई जा रही है, जो मानवता और संवेदना की मिसाल है। यहाँ उन बेटियों के लिए भी श्राद्ध और पिंडदान किया जाता है जो दुनिया में आने से पहले ही दुनिया से विदा हो गईं, साथ ही उन लावारिस लोगों का भी तर्पण किया जाता है जिनका अंतिम संस्कार करने वाला कोई अपना नहीं था। इस साल 4 अक्टूबर को मातृ नवमी के अवसर पर यह विशेष अनुष्ठान आयोजित किया जाएगा।

इस नेक पहल के तहत करीब 9,800 अजन्मी बेटियों और 52 लावारिस शवों के लिए पिंडदान की तैयारी की गई है। इनमें से 29 लोग ऐसे हैं जिनकी पहचान अब तक नहीं हो पाई है। 'आगमन' नामक सामाजिक संस्था गंगा घाट पर इन अजन्मी बेटियों के लिए तर्पण करेगी, जबकि 'अमन कबीर सेवा ट्रस्ट' उन लावारिस व्यक्तियों के श्राद्ध कर्म की जिम्मेदारी संभालेगा।

कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ जागरूकता का संदेश

आगमन संस्था के अध्यक्ष डॉ. संतोष ओझा पिछले 12 वर्षों से यह निस्वार्थ सेवा कर रहे हैं। उनका कहना है कि अब तक लगभग 1,63,700 महिला भ्रूणों का तर्पण किया जा चुका है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में कन्या भ्रूण हत्या के प्रति जागरूकता फैलाना और उन बेटियों को धार्मिक गरिमा प्रदान करना है जिन्हें जीवन का अवसर नहीं मिला। इस विधि में जौ के आटे, तिल और शहद से पिंड तैयार किए जाते हैं। वैदिक परंपराओं के अनुसार इन अनुष्ठानों को पूरा करने के लिए 11 पुजारियों और संस्था के 22 सदस्यों की टीम तैनात रहेगी।

वहीं, अमन कबीर सेवा ट्रस्ट के सामाजिक कार्यकर्ता अमन कबीर ने बताया कि उनका ट्रस्ट लंबे समय से बीमार और बेसहारा लोगों की सेवा कर रहा है। वे उन लोगों का अंतिम संस्कार करते हैं जिनके रिश्तेदार नहीं होते या जो पहचान योग्य नहीं होते। इस वर्ष ट्रस्ट ने 52 लावारिस शरीरों के अंतिम संस्कार और श्राद्ध की व्यवस्था की है। उल्लेखनीय है कि अमन कबीर के इन सामाजिक कार्यों के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उन्हें पहले सम्मानित भी किया जा चुका है।

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