वाराणसी रोपवे प्रोजेक्ट: कैंट से गोदौलिया का सफर अब सिर्फ 16 मिनट में, काम 96% पूरा

वाराणसी रोपवे प्रोजेक्ट 96% पूरा हो गया है। अब कैंट से गोदौलिया की दूरी महज 16 मिनट में तय होगी। जानें किराया और अन्य विवरण।

Shubham Singh5 November 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
वाराणसी रोपवे प्रोजेक्ट: कैंट से गोदौलिया का सफर अब सिर्फ 16 मिनट में, काम 96% पूरा

धर्म और संस्कृति की नगरी काशी में सफर करने वालों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। वाराणसी रोपवे प्रोजेक्ट अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है और इसका करीब 96 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के शुरू होने के बाद वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया तक का सफर, जो अक्सर ट्रैफिक जाम की वजह से घंटों ले लेता था, अब महज 16 मिनट में पूरा हो जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च 2023 को इस प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी थी। लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह रोपवे सिस्टम शहर की शहरी गतिशीलता (अर्बन मोबिलिटी) को पूरी तरह बदल देगा। कुल 3.85 किलोमीटर लंबे इस रूट पर पांच स्टेशन बनाए गए हैं, जिनमें वाराणसी कैंट, काशी विद्यापीठ, रथ यात्रा, गिरजाघर और गोदौलिया शामिल हैं।

किराया, क्षमता और खास सुविधाएं

इस रोपवे सिस्टम में कुल 148 गोंडोला (केबिन) चलेंगे, जिनमें से प्रत्येक में 10 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। यात्रियों की सुविधा और बजट को ध्यान में रखते हुए किराए का ढांचा भी तय कर लिया गया है:

  • न्यूनतम किराया: बीच के स्टेशनों के बीच यात्रा के लिए शुरुआती किराया 10 रुपये रखा गया है।
  • पूरा सफर: कैंट से गोदौलिया तक जाने के लिए 50 रुपये का टिकट लगेगा।
  • प्रीमियम सेवा: जो लोग प्रीमियम गोंडोला का अनुभव लेना चाहते हैं, उनके लिए किराया 2,000 रुपये होगा।
  • स्मार्ट पास: स्मार्ट पास का उपयोग करने वाले यात्रियों को 20 से 30 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी।

सामान ले जाने के नियमों की बात करें तो यात्रियों को अधिकतम 7 किलोग्राम वजन ले जाने की अनुमति होगी। यदि सामान इससे अधिक होता है, तो यात्री को अतिरिक्त टिकट खरीदना होगा।

सुरक्षा के लिहाज से इस प्रोजेक्ट में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। इसमें सेंसर-आधारित मॉनिटरिंग और एडवांस बैकअप सिस्टम लगाए गए हैं, ताकि बिजली गुल होने या किसी तकनीकी खराबी की स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। वर्तमान में सुरक्षा निरीक्षण और तकनीकी ट्रायल चल रहे हैं। सभी जरूरी क्लीयरेंस मिलने के बाद, उम्मीद है कि यह सेवा दिसंबर 2026 तक पूरी तरह शुरू हो जाएगी।

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