वाराणसी में धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ फूटा गुस्सा, भगवान कृष्ण पर टिप्पणी को लेकर भारी विरोध
भगवान कृष्ण पर विवादित टिप्पणी के बाद वाराणसी में धीरेंद्र शास्त्री का विरोध, सपा नेताओं ने फूंका पुतला और मांगा एक्शन।

धर्म की नगरी वाराणसी में उस समय माहौल गरमा गया जब धीरेंद्र शास्त्री द्वारा भगवान श्री कृष्ण के बारे में की गई कथित विवादित टिप्पणी को लेकर लोग सड़कों पर उतर आए। समाजवादी पार्टी के नेताओं और स्थानीय अधिवक्ताओं ने जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा इस कदर था कि उन्होंने शास्त्री के पोस्टरों पर जूते-चप्पल बरसाए और फिर उन्हें आग के हवाले कर दिया।
पूरा विवाद मध्य प्रदेश के शिवपुरी में आयोजित एक 'राम कथा' के दौरान शुरू हुआ। बताया जा रहा है कि धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान राम और भगवान कृष्ण के शारीरिक स्वरूप, व्यवहार और आचरण की तुलना की थी। विशेष रूप से भगवान कृष्ण की 'त्रिभंग' मुद्रा और बांसुरी वादन को लेकर उनके बयानों को भक्तों ने अपमानजनक माना, जिसके बाद यह विवाद तेजी से बढ़ा।
सपा ने लगाया समाज को बांटने का आरोप, पुलिस से की शिकायत
इस मामले में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने वाराणसी में इन टिप्पणियों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह सनातन समाज की एकता को तोड़ने की एक साजिश है। उन्होंने इस मामले में सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
विरोध केवल जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ परिसर में भी समाजवादी छात्र सभा के कार्यकर्ताओं ने धीरेंद्र शास्त्री का पुतला फूंका। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कमिश्नर को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में शास्त्री के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए।
बढ़ते तनाव और भारी विरोध के बीच, धीरेंद्र शास्त्री ने सोमवार, 2 नवंबर 2026 को नैरोबी, केन्या से एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने अपनी बातों के लिए माफी मांगते हुए स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी भी देवता का अपमान करना या राम और कृष्ण के भक्तों के बीच दरार पैदा करना नहीं था। उन्होंने कहा कि उनकी बातें केवल ब्रज की भक्ति परंपरा के संदर्भ में कही गई थीं।