वाराणसी: गरबा-डांडिया कार्यक्रमों में एंट्री पर बवाल, अब आधार कार्ड और तिलक देखकर अंदर जाने देंगे VHP-बजरंग दल

धर्म की नगरी वाराणसी में शारदीय नवरात्रि के उत्सव के बीच गरबा और डांडिया कार्यक्रमों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए कुछ पोस्टरों ने शहर में तनाव पैदा कर दिया है, जिनमें मुस्लिम समुदाय पर 'लव जिहाद' और नशीले पदार्थों को बढ़ावा देने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस खींचतान के बीच अब विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल ने इन कार्यक्रमों में गैर-सनातनियों के प्रवेश को रोकने के लिए मोर्चा खोल दिया है।
शहर के कई लॉन और क्लबों के बाहर अब ऐसे पोस्टर नजर आ रहे हैं, जिन पर साफ तौर पर लिखा है कि 'गैर-सनातनियों का प्रवेश वर्जित है'। इन पोस्टरों के जरिए आयोजकों और प्रशासन को चेतावनी दी गई है कि यदि कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी उनकी होगी।
आधार कार्ड और कलावा की होगी जांच
बजरंग दल के काशी क्षेत्र प्रमुख निखिल त्रिपाठी 'रुद्र' ने इस पूरे अभियान की कमान संभाली है। उनका कहना है कि गरबा और डांडिया केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि देवी आदिशक्ति की उपासना से जुड़े सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग इन कार्यक्रमों की आड़ में हिंदू युवाओं को गुमराह करने की कोशिश करते हैं, हालांकि इन दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया है।
बजरंग दल और VHP ने अब एक खास रणनीति तैयार की है। शहर के सभी गरबा और डांडिया वेन्यू पर कार्यकर्ताओं की ड्यूटी एक रोस्टर के अनुसार लगाई जाएगी। एंट्री गेट पर मौजूद कार्यकर्ता आने वाले लोगों के आधार कार्ड की जांच करेंगे। इसके अलावा, माथे पर तिलक और हाथ में कलावा होने को प्रवेश का आधार बनाया जाएगा। जो लोग इन मानकों पर खरे नहीं उतरेंगे, उन्हें कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इस सख्त कदम के बाद स्थानीय स्तर पर एक नई बहस छिड़ गई है। जहां कुछ लोग इसे अपनी संस्कृति की सुरक्षा बता रहे हैं, वहीं अन्य इसे धार्मिक उत्सवों में भेदभाव और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन मान रहे हैं।