कोडीन कफ सिरप मामला: वाराणसी कोर्ट ने वैशाली गोस्वामी के खिलाफ जारी किया गैर-जमानती वारंट

कोडीन कफ सिरप मामला: वाराणसी कोर्ट ने वैशाली गोस्वामी के खिलाफ जारी किया गैर-जमानती वारंट

वाराणसी में प्रतिबंधित कोडीन कफ सिरप की तस्करी के बड़े मामले में पुलिस और कोर्ट की सख्ती जारी है। इस मामले में अब एक नया मोड़ आया है, जहां कोर्ट ने शुभम जायसवाल की पत्नी वैशाली गोस्वामी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया है। यह कार्रवाई कोतवाली पुलिस स्टेशन में पिछले साल नवंबर में दर्ज किए गए मामले के सिलसिले में की गई है।

एसीपी कोतवाली विजय प्रताप सिंह ने जानकारी दी कि पुलिस कमिश्नर के निर्देशों पर इस मामले में लगातार जांच और कार्रवाई चल रही थी। जांच के दौरान वैशाली गोस्वामी का नाम सामने आया, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश देते हुए एनबीडब्ल्यू जारी किया। पुलिस की टीमें अब उनकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही हैं ताकि उन्हें जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जा सके।

करोड़ों की संपत्ति फ्रीज और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन का खुलासा

यह मामला केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट से जुड़े हुए हैं। इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जनवरी में वाराणसी पुलिस ने मुख्य आरोपी भोला जायसवाल और अन्य लोगों की करीब 31 करोड़ रुपये की आठ अचल संपत्तियां फ्रीज कर दी थीं। यह कार्रवाई एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत की गई थी।

इस पूरे रैकेट की गहराई तक जाने के लिए यूपी पुलिस की एसआईटी (SIT) ने भी जांच की और अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी। एसआईटी की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं:

  • इस सिंडिकेट में फार्मास्यूटिकल खेप की हेराफेरी और हवाला लेनदेन का इस्तेमाल किया जा रहा था।
  • रैकेट के कथित सरगना विभोर राणा को 2016 में लाइसेंस मिला था।
  • रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस कारोबार में शामिल फर्मों को पिछली समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल के दौरान लाइसेंस दिए गए थे।
  • नेपाल सीमा के पास मदरसों पर हुई सख्ती के कारण तस्करी के इस नेटवर्क पर असर पड़ा, जिससे आरोपियों को अपनी गतिविधियां अस्थायी रूप से रोकनी पड़ीं।

पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के अन्य सदस्यों और वैशाली गोस्वामी की भूमिका की गहनता से जांच कर रही है।

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