वाराणसी में जुटेगा दुनिया का ज्ञान: आधुनिक चुनौतियों का समाधान खोजेंगे वैश्विक विद्वान
वाराणसी में 2 से 4 नवंबर तक 'प्राचीन ज्ञान' पर वैश्विक संगोष्ठी होगी, जिसमें दुनिया भर के विद्वान आधुनिक समस्याओं के समाधान खोजेंगे।

धर्म और आध्यात्म की नगरी वाराणसी एक बार फिर वैश्विक चर्चा का केंद्र बनने जा रही है। शहर में 2 से 4 नवंबर तक 'प्राचीन ज्ञान और आधुनिक चुनौतियां' (Ancient Wisdom for Modern Challenges) विषय पर एक तीन दिवसीय वर्ल्ड सिम्पोजियम का आयोजन किया जा रहा है। इस खास आयोजन में भारत सहित दुनिया भर के दिग्गज विद्वान, दार्शनिक, बिजनेस लीडर्स और नीति विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे। इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य यह तलाशना है कि भारत की प्राचीन दार्शनिक और आध्यात्मिक परंपराएं आज की वैश्विक समस्याओं को सुलझाने में कैसे मददगार हो सकती हैं।
इस आयोजन में विशेष रूप से हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म के सिद्धांतों पर चर्चा होगी। पूरी चर्चा को चार मुख्य विषयों में बांटा गया है, जिनमें सभ्यताओं के बीच शांति और संवाद, सतत विकास, ग्रह प्रबंधन, नैतिकता, शासन और मानवीय कल्याण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागी वाराणसी के ऐतिहासिक स्थलों और सारनाथ का भ्रमण भी करेंगे, जहां भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था। यह पूरा आयोजन 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना पर आधारित है, जो पूरी दुनिया को एक परिवार मानकर शांति और सहयोग की बात करता है।
वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए साझा प्रयास
यूएन सस्टेनेबल डेवलपमेंट सॉल्यूशंस नेटवर्क के अध्यक्ष जेफरी सैक्स ने इस आयोजन को लेकर अपना उत्साह जाहिर किया। उन्होंने कहा कि आज की वैश्विक परिस्थितियों में समाज के हर वर्ग को शांति और सहयोग के लिए अपना योगदान देना होगा। उन्होंने जोर दिया कि दुनिया को समृद्धि, सामाजिक न्याय और पर्यावरणीय स्थिरता के साझा लक्ष्यों के साथ सद्भाव और विविधता के एक साझा रास्ते पर चलने की जरूरत है। सैक्स ने यह भी बताया कि इस बैठक के परिणामों से वह संयुक्त राष्ट्र के नए महासचिव को अवगत कराएंगे, ताकि वैश्विक स्तर पर शांति और संवाद की नींव मजबूत हो सके।
वहीं, नीदरलैंड की उट्रेच यूनिवर्सिटी की एसोसिएट प्रोफेसर कियारा रॉबियानो ने कहा कि प्राचीन ज्ञान हमें उन ढांचों और अवधारणाओं को प्रदान कर सकता है, जिनकी मदद से हम आज की मुश्किलों को नए नजरिए से देख सकते हैं। उन्होंने विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद की आवश्यकता पर बल दिया। इसी तरह, रोम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रिकार्डो पॉज़ो ने वर्तमान समय में 'ग्रीन' और 'डिजिटल ट्रांज़िशन' को सबसे बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि बुद्ध, अरस्तू और कन्फ्यूशियस जैसे महान विचारकों का ज्ञान हमें सार्थक प्रगति की दिशा दिखाने में सक्षम है।