यूपी वोटर लिस्ट रिवीजन: अब बिना चुनाव आयोग की मंजूरी के नहीं होंगे अधिकारियों के तबादले

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) कार्य को बिना किसी बाधा के पूरा करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने एक बड़ा फैसला लिया है। आयोग ने सख्त निर्देश जारी किए हैं कि इस महत्वपूर्ण कार्य से जुड़े किसी भी अधिकारी का स्थानांतरण (ट्रांसफर) अब उसकी पूर्व अनुमति के बिना नहीं किया जाएगा। यह नियम ड्राफ्ट प्रकाशन से लेकर अंतिम प्रकाशन तक लागू रहेगा, ताकि वोटर लिस्ट के काम में कोई रुकावट न आए।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह कदम 1 जनवरी 2027 की अर्हता तिथि के आधार पर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए उठाया गया है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा-13 CC के तहत, मतदाता सूची की तैयारी और संशोधन में लगे अधिकारी चुनाव आयोग के प्रतिनियुक्ति पर माने जाते हैं। इस दौरान वे पूरी तरह से आयोग के नियंत्रण, पर्यवेक्षण और अनुशासन के अधीन कार्य करते हैं।
रिवीजन की समयसीमा और महत्वपूर्ण तारीखें
चुनाव आयोग ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक विस्तृत शेड्यूल तैयार किया है, ताकि काम पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से समय पर पूरा हो सके। इस प्रक्रिया के मुख्य चरण इस प्रकार हैं:
- 12 नवंबर 2026: एकीकृत मतदाता सूची का आलेख्य (ड्राफ्ट) प्रकाशन किया जाएगा।
- 12 नवंबर से 11 दिसंबर 2026: इस अवधि के दौरान जनता से दावे और आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी।
- 28 दिसंबर 2026: प्राप्त सभी दावों और आपत्तियों का नियमानुसार निस्तारण कर दिया जाएगा।
- 04 जनवरी 2027: मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि पुनरीक्षण अवधि के दौरान जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पद खाली नहीं रखे जाएंगे। संबंधित विभागों को इन निर्देशों से अवगत करा दिया गया है ताकि 2027 के लिए मतदाता सूची का कार्य सुचारु और पारदर्शी ढंग से संपन्न हो सके।