यूपी वोटर लिस्ट रिवीजन में गड़बड़ी का आरोप, फॉर्म-7 पर उठे गंभीर सवाल

KhabarCentral10 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
यूपी वोटर लिस्ट रिवीजन में गड़बड़ी का आरोप, फॉर्म-7 पर उठे गंभीर सवाल

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष एकीकृत संशोधन (SIR) की प्रक्रिया अब विवादों के घेरे में है। 'द रिपोटर्स कलेक्टिव' की एक जांच रिपोर्ट ने वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-7 की प्रकिया पर बड़े सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि लाखों मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही है और कई नियमों की अनदेखी की गई है।

जांच के मुताबिक, चुनाव आयोग की वेबसाइट से 43 लाख से ज्यादा फॉर्म-7 आवेदनों का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि चुनाव पंजीकरण अधिकारियों (ERO) और सहायक चुनाव पंजीकरण अधिकारियों (AERO) द्वारा शुरू किए गए 87,127 विलोपन अनुरोधों में से 85,854 में नाम हटाने का कोई ठोस कारण दर्ज नहीं था। यह लगभग 98.5 प्रतिशत मामले हैं, जहां बिना किसी स्पष्ट कारण के नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। आरोप है कि ERONET सॉफ्टवेयर ने इन फॉर्मों को ऑटोमैटिक तरीके से जेनरेट किया, जिन्हें बाद में अधिकारियों ने डिजिटल रूप से साइन कर दिया।

अधिकारियों के दावे और टारगेटेड विलोपन के आरोप

इस पूरे मामले पर उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिन्वा ने सफाई दी है। उनका कहना है कि अधिकारियों ने अपनी पहल पर सुनवाई की और नोटिस जारी किए, जिसके बाद रिकॉर्ड रखने के लिए फॉर्म-7 जेनरेट किए गए। हालांकि, रिपोर्ट में इस बात पर विरोधाभास है कि इतने बड़े पैमाने पर कारणों का उल्लेख क्यों नहीं किया गया।

रिपोर्ट में कुछ और चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं:

  • समय सीमा का उल्लंघन: आरोप है कि निजी व्यक्तियों द्वारा दिए गए 1,10,476 नाम हटाने के अनुरोध कानूनी समय सीमा समाप्त होने के बाद स्वीकार किए गए।
  • टारगेटेड विलोपन: पीलीभीत और तरबगंज विधानसभा क्षेत्रों में यह दावा किया गया कि फॉर्म-7 के जरिए नाम हटाने के लगभग 90 प्रतिशत अनुरोध मुस्लिम मतदाताओं के थे। एक मामला ऐसा भी सामने आया जहां 'रेशमा' नाम की एक व्यक्ति ने एक ही दिन में एक ही बूथ के 188 मतदाताओं के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराई।
  • थोक आवेदन: जांच में 198 ऐसे मामले मिले जहां एक ही व्यक्ति ने 10 से अधिक फॉर्म-7 भरकर 4,740 मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की।

इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पीलीभीत और तरबगंज के जिन फॉर्म-7 का जिक्र है, उन्हें अंततः खारिज कर दिया गया था। चुनाव कार्यालय ने यह भी कहा कि कुल आवेदनों की संख्या के मुकाबले थोक आवेदनों के मामले सांख्यिकीय रूप से बहुत कम हैं।

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