श्रावस्ती में जाली नोटों का काला कारोबार, बंद राइस मिल में चल रहा था धंधा, 3 गिरफ्तार
यूपी एसटीएफ ने श्रावस्ती की एक बंद राइस मिल में चल रहे जाली नोट गिरोह का पर्दाफाश किया है। तीन आरोपी गिरफ्तार, भारी मात्रा में उपकरण बरामद।

उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और स्थानीय पुलिस ने एक संयुक्त ऑपरेशन चलाकर श्रावस्ती में अंतर-जिला जाली नोट गिरोह का भंडाफोड़ किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा खेल एक बंद पड़ी राइस मिल के भीतर चल रहा था। पुलिस ने छापेमारी कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से नोट छापने की मशीनें और बड़ी मात्रा में नकली नोट बरामद किए हैं।
यह पूरी कार्रवाई 5 नवंबर, 2026 की रात को सोनवा थाना क्षेत्र के भिठिया चिचड़ी गांव में स्थित गिरिराज राइस मिल में की गई। पुलिस ने मौके से गिरिजा शंकर जायसवाल (बहराइच), नरेंद्र कुमार चौरसिया (श्रावस्ती) और व्रजेंद्र गोस्वामी (श्रावस्ती) को दबोचा है। तलाशी के दौरान पुलिस को कुल 1,74,000 रुपये के जाली नोट मिले, जिनमें 500, 200 और 100 रुपये के नोट शामिल थे।
यूट्यूब से सीखा नोट छापना, दिवाली पर चलाने थे जाली नोट
पुलिस को मौके से सिर्फ नोट ही नहीं, बल्कि नोट छापने का पूरा सेटअप मिला है। इसमें एक कैनन कलर प्रिंटर, इंक रिफिल, बॉन्ड पेपर, नोट काटने वाली डाई, कटर ब्लेड और कैंची बरामद हुई है। जांच में पता चला कि यह प्रिंटिंग उपकरण लखनऊ के लालबाग स्थित एक एजेंसी से खरीदे गए थे।
पुलिस अधीक्षक राहुल भाटी के मुताबिक, इस गिरोह की योजना दिवाली के त्योहार के दौरान स्थानीय बाजारों में इन जाली नोटों को खपाने की थी। यह गैंग लोगों को लुभाने के लिए एक खास ऑफर दे रहा था—वे 1 लाख रुपये असली नोट के बदले 3 लाख रुपये के जाली नोट देने का वादा करते थे।
पूछताछ के दौरान मुख्य आरोपी ने एक हैरान करने वाला खुलासा किया। उसने बताया कि जब वह मुंबई में रहता था, तब उसने यूट्यूब के जरिए जाली नोट छापने की तकनीक सीखी थी। इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व एसटीएफ मुख्यालय लखनऊ के अपर पुलिस अधीक्षक अमित कुमार नगर और सोनवा थाना प्रभारी विशुंदेव पांडे की टीम ने किया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने अब तक कितने जाली नोट बाजार में उतारे हैं और उनके नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है।