शहीदों के बलिदान को सलाम: यूपी पुलिस ने रिलीज की अमित साध अभिनीत शॉर्ट फिल्म 'वर्दी'

Shubham Singh21 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
शहीदों के बलिदान को सलाम: यूपी पुलिस ने रिलीज की अमित साध अभिनीत शॉर्ट फिल्म 'वर्दी'

देश की रक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाले जांबाजों की यादें कभी धुंधली नहीं पड़तीं। इसी भावना को पर्दे पर उतारते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस ने पुलिस स्मृति दिवस के मौके पर एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक शॉर्ट फिल्म 'वर्दी' रिलीज की है। यह फिल्म उन पुलिसकर्मियों को एक सच्ची श्रद्धांजलि है, जिन्होंने कर्तव्य की वेदी पर अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

डीजीपी राजीव कृष्णा के मार्गदर्शन में तैयार की गई यह फिल्म विशेष रूप से यूपी एसटीएफ के दिवंगत इंस्पेक्टर सुनील कुमार के अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा को समर्पित है। कीर्ति चक्र से सम्मानित इंस्पेक्टर सुनील कुमार की वीरता की कहानी को इस फिल्म के जरिए आम जनता तक पहुँचाया गया है। फिल्म में केवल वीरता ही नहीं, बल्कि एक शहीद के परिवार में छाई उस खामोशी और खालीपन को भी संवेदनशीलता के साथ दिखाया गया है, जो उनके जाने के बाद हमेशा के लिए घर का हिस्सा बन जाता है।

फिल्म की टीम और मुख्य कलाकार

इस शॉर्ट फिल्म का निर्देशन फिल्मफेयर पुरस्कार विजेता मशहूर निर्देशक तिग्मांशु धूलिया ने किया है। फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में जाने-माने अभिनेता अमित साध, अनुभवी अभिनेत्री अलका अमीन और नाज़िश खान नज़र आ रहे हैं। फिल्म की पटकथा और वॉयस-ओवर यूपी पुलिस सोशल मीडिया सेंटर में तैनात कॉन्स्टेबल कपिल दिनकर ने लिखा है, जबकि इसका क्रिएटिव डायरेक्शन आईपीएस राहुल श्रीवास्तव (एसपी/पीआरओ, डीजीपी) द्वारा किया गया है।

मुंबई में शूट की गई इस फिल्म का निर्माण सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उत्तर प्रदेश के सहयोग से किया गया है। गौरतलब है कि बीते 1 अक्टूबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शहीद सुनील कुमार की पत्नी मुनेश देवी को सम्मानित करते हुए उन्हें नकद राशि और अंगवस्त्रम भेंट किया था।

यूपी पुलिस की इस पहल का मुख्य उद्देश्य शहीद पुलिसकर्मियों के त्याग और समर्पण की कहानियों को समाज के सामने लाना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां और पुलिस बल के अन्य सदस्य राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित हो सकें। फिल्म का संदेश साफ है कि वर्दी पहनने वाला जब शहीद होता है, तो वह केवल एक अधिकारी नहीं, बल्कि एक परिवार का सहारा भी खो देता है, लेकिन उसका शौर्य राष्ट्र की स्मृति में सदैव जीवित रहता है।

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