यूपी पुलिस: सब-इंस्पेक्टर बने कांस्टेबलों से 8 लाख रुपये की रिकवरी, प्रमोशन पर लगा ब्रेक

यूपी पुलिस के 1700 कांस्टेबलों को सब-इंस्पेक्टर का प्रमोशन तो मिला, लेकिन अब ट्रेनिंग कॉस्ट के नाम पर 8 लाख रुपये मांगे जा रहे हैं।

Shubham Singh7 November 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
यूपी पुलिस: सब-इंस्पेक्टर बने कांस्टेबलों से 8 लाख रुपये की रिकवरी, प्रमोशन पर लगा ब्रेक

उत्तर प्रदेश पुलिस में प्रमोशन का सपना देखने वाले करीब 1700 कांस्टेबलों के लिए खुशी अब चिंता में बदल गई है। सब-इंस्पेक्टर (SI) के पद पर पदोन्नत हुए इन पुलिसकर्मियों के सामने अब एक ऐसी दीवार खड़ी हो गई है, जिसने उनकी नई जॉइनिंग को अधर में लटका दिया है। विभाग ने इन चयनित उम्मीदवारों से उनकी पुरानी ट्रेनिंग और सैलरी के नाम पर करीब 8 लाख रुपये की रिकवरी मांगी है, जिसके कारण वे अपने नए पद को ग्रहण नहीं कर पा रहे हैं।

पूरा मामला तब शुरू हुआ जब 6 नवंबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक भव्य समारोह में 4,543 उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र सौंपे। इनमें वे कांस्टेबल्स भी शामिल थे जिनका चयन प्रमोशन के जरिए सब-इंस्पेक्टर के रूप में हुआ था। लेकिन जैसे ही जॉइनिंग की बारी आई, इन जवानों को बताया गया कि उन्हें अपनी पुरानी सर्विस बॉन्ड की शर्तों के मुताबिक ट्रेनिंग का खर्च चुकाना होगा।

बॉन्ड की शर्त और रिकवरी का गणित

विभागीय नियमों के मुताबिक, जब कोई सिपाही भर्ती होता है, तो वह एक सर्विस बॉन्ड साइन करता है। इस बॉन्ड की शर्त यह है कि यदि कोई कर्मी अपनी पूरी ट्रेनिंग और दो साल की प्रोबेशन अवधि पूरी करने से पहले पद छोड़ता है, तो उसे ट्रेनिंग का खर्च और उस दौरान मिली सैलरी वापस करनी होगी। विभाग ने रिकवरी की राशि को दो हिस्सों में बांटा है:

  • ट्रेनिंग खर्च: लगभग 2.58 लाख रुपये।
  • सैलरी और भत्ते: प्रोबेशन पीरियड के दौरान मिले करीब 5.42 लाख रुपये।

प्रभावित पुलिसकर्मियों का तर्क है कि वे उत्तर प्रदेश पुलिस बल को छोड़कर कहीं जा नहीं रहे हैं, बल्कि उसी विभाग में एक उच्च रैंक पर जा रहे हैं। उनका कहना है कि जब वे विभाग में ही बने हुए हैं, तो उनसे इस तरह की भारी-भरकम राशि की मांग करना गलत है। कई जवानों ने अपनी आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए इस रिकवरी को माफ करने की गुहार लगाई है।

दूसरी ओर, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी इस्तीफे और विभागीय बदलाव तय सर्विस नियमों और जॉइनिंग बॉन्ड की शर्तों के आधार पर ही प्रोसेस किए जाते हैं। फिलहाल यह पूरा मामला पुलिस मुख्यालय (PHQ) के पास विचाराधीन है, और सभी की नजरें अब वहां से आने वाले फैसले पर टिकी हैं कि क्या इन जवानों को राहत मिलेगी या उन्हें अपनी जेब से लाखों रुपये चुकाने होंगे।

Share:

Comments

Leave a comment