मऊ: AI से फर्जी मौत का नाटक कर छिपा था हत्यारा, यूपी पुलिस ने ऐसे दबोचा

मऊ पुलिस ने एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया जिसने AI दस्तावेजों और नकली शव के जरिए अपनी मौत का नाटक रचा था।

Sushant Singh26 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
मऊ: AI से फर्जी मौत का नाटक कर छिपा था हत्यारा, यूपी पुलिस ने ऐसे दबोचा

उत्तर प्रदेश की मऊ पुलिस ने एक ऐसे शातिर अपराधी को गिरफ्तार किया है, जिसने कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए तकनीक का सहारा लिया और खुद को 'मर चुका' घोषित कर दिया। यूपी पुलिस ने हत्यारा पकड़ा है, जिसने न केवल अपनी मौत का फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया, बल्कि AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का इस्तेमाल कर ऐसे दस्तावेज तैयार किए कि पुलिस और अदालत भी चकमा खा गए।

यह पूरा मामला 2016 के एक मर्डर केस से जुड़ा है। आरोपी राजू, जिसे राजकुमार राजभर के नाम से भी जाना जाता है, पर दिसंबर 2016 में मुंशीपुरा रेलवे लाइन के पास योगेश सिंह की गोली मारकर हत्या करने का आरोप था। गिरफ्तारी से बचने और शेयर ट्रेडिंग के जरिए जमा किए गए पैसों को हड़पने के लिए राजू ने एक ऐसी साजिश रची, जो किसी फिल्मी कहानी जैसी लगती है।

बकरी के शव का इस्तेमाल और AI का खेल

जांच में सामने आया कि 30 मई 2025 को राजू ने गाजीपुर के एक श्मशान घाट पर अपनी ही मौत का नाटक किया। बताया जा रहा है कि उसने चिता पर एक बकरी के शव का इस्तेमाल किया ताकि फोटो और वीडियो सबूत जुटाए जा सकें। इस नाटक में उसके परिवार के सदस्य भी शामिल थे और उसके बेटे ने अंतिम संस्कार की रस्में निभाईं। इसके बाद, राजू ने AI जनरेटेड तस्वीरों और फर्जी कागजों के जरिए गाजीपुर और मऊ के अधिकारियों से मृत्यु प्रमाण पत्र हासिल कर लिए और इन्हें अदालत में पेश कर दिया ताकि उसके खिलाफ चल रहा केस बंद हो जाए।

करीब 18 महीने तक 'मृत' व्यक्ति बनकर रहने वाला राजू आखिरकार पुलिस की पकड़ में आ गया। 25 अक्टूबर 2026 की सुबह करीब 9:10 बजे, जब वह ख्वाजाजहाँपुर इलाके में अपनी पत्नी और बेटे से मिलने की कोशिश कर रहा था, तब मऊ कोतवाली नगर पुलिस, SOG और सर्विलांस टीम ने उसे धर दबोचा।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) अनूप कुमार ने पुष्टि की है कि आरोपी को अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या उसकी पत्नी ने उसकी फर्जी मौत के आधार पर 10 लाख रुपये का बीमा क्लेम लिया था। साथ ही, उन दो होम्योपैथिक डॉक्टरों की भूमिका की भी जांच हो रही है जिन्होंने राजू की शेयर ट्रेडिंग स्कीम में निवेश किया था। इस केस में उसका साथी सुदर्शन राजभर अभी भी कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रहा है।

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