यूपी पंचायत चुनाव में 27% OBC आरक्षण रहेगा बरकरार, हाई कोर्ट ने 3 महीने में चुनाव कराने का दिया आदेश

Shubham Singh15 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
यूपी पंचायत चुनाव में 27% OBC आरक्षण रहेगा बरकरार, हाई कोर्ट ने 3 महीने में चुनाव कराने का दिया आदेश

उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनावों को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में पंचायत चुनाव मौजूदा आरक्षण ढांचे के तहत ही कराए जाएंगे, जिसमें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27% का कोटा शामिल है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वे आगामी तीन महीनों के भीतर चुनाव की प्रक्रिया पूरी करें।

जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने यह साफ किया कि OBC आरक्षण पर बने समर्पित आयोग की रिपोर्ट आने तक चुनावों को टाला नहीं जा सकता। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि जांच पूरी नहीं हुई है, OBC आरक्षित सीटों को सामान्य सीटों में नहीं बदला जा सकता। इसके साथ ही अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और महिलाओं के लिए निर्धारित आरक्षण भी कानून के अनुसार जारी रहेगा, बशर्ते वह कुल वर्टिकल रिजर्वेशन की 50% की सीमा के भीतर हो।

सर्वेक्षण में मिलीं खामियां, रिपोर्ट पर उठाए सवाल

अदालत ने OBC आरक्षण के निर्धारण के लिए बनाए गए पांच सदस्यीय आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने पाया कि आयोग द्वारा प्रस्तुत किए गए आंकड़ों में बड़ी कमियां हैं। उदाहरण के तौर पर, आगरा जैसे जिले में जहां ग्रामीण आबादी 25 लाख से ज्यादा है, वहां सर्वे मीटिंग में केवल 175 लोग शामिल हुए और सिर्फ 29 फॉर्म जमा किए गए। हैरान करने वाली बात यह रही कि कुछ फॉर्म तो ऐसे लोगों ने भरे थे जो OBC श्रेणी से थे ही नहीं, जबकि कई फॉर्मों में केवल 'हां' या 'ना' में जवाब दिए गए थे।

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि 'पिछड़ों में सबसे पिछड़े' की पहचान करने के लिए कोई स्पष्ट मापदंड तय नहीं किया गया था। हालांकि, अदालत ने भविष्य में एक वैध रिपोर्ट आने की संभावना को खुला रखा है और सरकार को सुझाव दिया है कि स्थानीय निकायों के डेटा रजिस्टर और सामाजिक-आर्थिक संकेतकों के आधार पर मूल्यांकन किया जाए।

एक अन्य महत्वपूर्ण बिंदु पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने ग्राम प्रधानों के कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्हें प्रशासक नियुक्त करने के सरकारी आदेश को सही ठहराया है। हालांकि, कोर्ट ने चेतावनी दी कि यह व्यवस्था केवल अस्थायी होनी चाहिए और चुनाव संपन्न होने के बाद प्रशासकों का कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

राज्य चुनाव आयोग ने अदालत को सूचित किया कि मतदाता सूची 10 जून 2026 को प्रकाशित की जा चुकी है और पर्याप्त संसाधन मिलने पर चुनाव कराए जा सकते हैं। अब सरकार को निर्देश दिया गया है कि वह चुनाव आयोग को जरूरी फंड, सुरक्षा और कर्मचारी उपलब्ध कराए ताकि समय सीमा के भीतर मतदान संपन्न हो सके।

Share:

Comments

Leave a comment