यूपी एमएलसी चुनाव: शिक्षकों ने दिखाया दम, स्नातकों का उत्साह रहा कम; मतदान संपन्न
उत्तर प्रदेश में 11 एमएलसी सीटों के लिए मतदान संपन्न। शिक्षकों में अधिक उत्साह, जबकि स्नातक सीटों पर मतदान कम रहा। जानें पूरा अपडेट।

उत्तर प्रदेश में विधान परिषद (MLC) की 11 सीटों के लिए शुक्रवार को मतदान की प्रक्रिया पूरी हो गई। इन सीटों में 6 शिक्षकों के लिए और 5 स्नातकों के लिए आरक्षित थीं। पूरे प्रदेश में कुल 55.24% मतदान दर्ज किया गया, लेकिन दिलचस्प बात यह रही कि शिक्षकों ने मतदान में अधिक रुचि दिखाई, जबकि स्नातकों का टर्नआउट काफी कम रहा। कुल 14.81 लाख पंजीकृत मतदाताओं ने 152 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करने के लिए अपने वोट डाले।
मतदान के आंकड़ों पर नजर डालें तो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में 55.76% वोट पड़े, जबकि स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में यह आंकड़ा महज 38.72% रहा। सबसे अधिक मतदान गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 79.01% दर्ज किया गया, वहीं सबसे कम मतदान इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर रहा, जहां केवल 26.30% लोगों ने वोट डाला। इस चुनाव में ईवीएम के बजाय पेपर बैलेट का इस्तेमाल किया गया और वोटिंग सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक चली।
सियासी घमासान और आरोप-प्रत्यारोप
चुनाव के दौरान राजनीतिक माहौल काफी गरमाया रहा। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। गोरखपुर, वाराणसी, आगरा, मेरठ, फतेहपुर और मुजफ्फरनगर जैसे जिलों में झड़पों की खबरें आईं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सैफई (इटावा) में वोट डाला और भाजपा पर फतेहपुर में बूथ कैप्चरिंग की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
दूसरी ओर, भाजपा के खेमे में जीत का भरोसा दिख रहा है। जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने दावा किया कि भाजपा सभी 11 सीटों पर जीत दर्ज करेगी। वहीं, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने लखनऊ में अपना वोट डाला। सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने भी अपनी पार्टी की जीत का विश्वास जताया।
प्रशासनिक स्तर पर, मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिन्वा ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि यदि मतदाता की पहचान सही है, तो मतदाता सूची की छोटी गलतियों के बावजूद उन्हें वोट डालने दिया जाए। लखनऊ में मतदान को आसान बनाने के लिए सभी शैक्षणिक संस्थानों में छुट्टी घोषित की गई थी, हालांकि वहां मतदान का प्रतिशत औसत से कम रहा। अब सबकी नजरें 27 अक्टूबर पर टिकी हैं, जब वोटों की गिनती होगी और नतीजे सामने आएंगे।