यूपी विधान परिषद चुनाव: बीजेपी ने मारी बाजी, मतगणना के बीच सपा ने लगाए धांधली के आरोप
यूपी विधान परिषद चुनाव में बीजेपी ने शिक्षक और स्नातक सीटों पर मारी बाजी, लेकिन मतगणना के दौरान हंगामा और धांधली के आरोप लगे।

उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। मतगणना के शुरुआती रुझानों और परिणामों के अनुसार, बीजेपी ने लखनऊ, मेरठ-सहारनपुर और बरेली-मुरादाबाद सहित कुल चार सीटों पर जीत दर्ज की है। राज्य के सात प्रमुख केंद्रों पर सुबह 8 बजे से शुरू हुई इस गिनती ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है।
मेरठ निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी का दबदबा साफ नजर आया, जहां शिक्षक सीट पर श्रीचंद शर्मा और स्नातक सीट पर दिनेश गोयल ने जीत हासिल की। वहीं, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी के डॉ. हरि सिंह ढिल्लों ने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार हाजी दानिश अख्तर को 17,676 वोटों के भारी अंतर से मात दी। हालांकि, वाराणसी शिक्षक सीट पर समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव ने बीजेपी के प्रमोद कुमार मिश्रा को हराकर अपनी जीत दर्ज कराई है।
मतगणना केंद्रों पर हंगामा और अधिकारियों पर गाज
जीत और हार के बीच चुनाव प्रक्रिया विवादों में भी घिरी रही। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मतगणना में अनियमितताओं और देरी का आरोप लगाया है। उन्होंने एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें दावा किया गया कि लखनऊ केंद्र पर बीजेपी सदस्य हंगामा कर रहे थे। वहीं, आगरा में चुनाव आयोग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लापरवाही बरतने के आरोप में छह अधिकारियों को निलंबित कर दिया है और 21 अन्य के खिलाफ जांच शुरू की है।
इस चुनाव की कुछ अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां इस प्रकार हैं:
- कुल सीटें: 11 सीटों (5 स्नातक और 6 शिक्षक) के लिए मतदान हुआ।
- उम्मीदवार: कुल 152 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई।
- मतदान प्रतिशत: चुनाव में 55.24% वोटिंग दर्ज की गई।
- अन्य रुझान: लखनऊ में बीजेपी के उमेश द्विवेदी 3,600 से अधिक वोटों से आगे चल रहे हैं, जबकि इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर सपा के डॉ. मानसिंह यादव बीजेपी के अशोक कुमार राठौर से 7,648 वोटों से आगे हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी केंद्रों पर सीसीटीवी निगरानी और सख्त सुरक्षा के निर्देश दिए थे। गौरतलब है कि विधान परिषद एक स्थायी सदन है, जिसके सदस्यों का कार्यकाल छह वर्ष का होता है और हर दो साल में एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं।