यूपी सरकारी नौकरी के लिए कड़े नियम: हिंसक प्रदर्शन करने वालों को नहीं मिलेगी नौकरी

उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी भर्तियों के लिए चरित्र सत्यापन के कड़े नियम लागू किए हैं। हिंसक प्रदर्शन करने वाले अब नौकरी से वंचित रहेंगे।

Sushant Singh29 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
यूपी सरकारी नौकरी के लिए कड़े नियम: हिंसक प्रदर्शन करने वालों को नहीं मिलेगी नौकरी

उत्तर प्रदेश की सरकारी सेवाओं में सीधी भर्ती के लिए अब उम्मीदवारों को कड़े चरित्र और पूर्ववृत्त सत्यापन (Character and Antecedent Verification) से गुजरना होगा। राज्य सरकार ने इसके लिए एक नई एकीकृत नीति लागू की है, जिसका मुख्य उद्देश्य सरकारी तंत्र में केवल योग्य और अनुशासित व्यक्तियों को शामिल करना है। इस नई नीति के तहत अब उन लोगों की सरकारी नौकरी पर तलवार लटक गई है, जो शासन बदलने के उद्देश्य से किए गए हिंसक प्रदर्शनों में शामिल रहे हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि जो लोग हिंसक गतिविधियों में लिप्त पाए जाएंगे, उन्हें राज्य की सेवाओं में आने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह नई नीति 29 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी और इसका दायरा काफी व्यापक है। यह नियम सरकारी विभागों, निगमों, परिषदों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वायत्त निकायों, पंचायतों और स्थानीय निकायों सहित सभी सरकारी संस्थाओं पर लागू होगा।

इन अपराधों में संलिप्तता होगी नौकरी के लिए अयोग्यता

प्रिंसिपल सेक्रेटरी एम. देवराज द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, गंभीर अपराधों में आरोपी या दोषी व्यक्ति सरकारी सेवा के लिए अयोग्य माने जाएंगे। इसमें हत्या, दंगा, राजद्रोह, फिरौती के लिए अपहरण, बलात्कार, दहेज मृत्यु, पोक्सो एक्ट का उल्लंघन, भ्रष्टाचार, आतंकवादी गतिविधियां, पेपर लीक और सॉल्वर गैंग में शामिल होना जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। इसके अलावा, यदि किसी व्यक्ति को पहले कभी केंद्र या राज्य सरकार के किसी संगठन से बर्खास्त किया गया है, तो वह भी इस नौकरी के लिए अनुपयुक्त माना जाएगा।

सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर सरकार ने सख्त समयसीमा तय की है। नियुक्ति प्राधिकारी को उम्मीदवार का विवरण पुलिस महानिदेशक (इंटेलिजेंस) और संबंधित जिला मजिस्ट्रेटों को भेजना होगा। जिला पुलिस और स्थानीय खुफिया इकाइयों को 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी होगी। यदि इस समयसीमा का पालन नहीं होता है, तो मामला गृह विभाग तक भेजा जा सकता है।

हालांकि, सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण भी दिए हैं। केवल एफआईआर (FIR) दर्ज होने या जांच लंबित होने मात्र से किसी उम्मीदवार को अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा; निर्णय इस आधार पर होगा कि आरोप तय हुए हैं या दोषसिद्धि हुई है। साथ ही, किसी व्यक्ति की राजनीतिक विचारधारा के आधार पर उसे नौकरी से वंचित नहीं किया जाएगा।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि कोई उम्मीदवार अपने आवेदन या स्व-घोषणा पत्र में अपने आपराधिक इतिहास, गिरफ्तारी या लंबित मामलों की जानकारी छुपाता है, तो उसकी नियुक्ति रद्द की जा सकती है और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। यदि सत्यापन रिपोर्ट प्रतिकूल आती है, तो उम्मीदवार को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाएगा। संवेदनशील या सुरक्षा से जुड़ी भूमिकाओं के लिए पूर्ण सत्यापन के बिना नियुक्ति पत्र जारी करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

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