यूपी के किसानों में गन्ने की नई किस्म CoS.23232 का जबरदस्त क्रेज, बुकिंग खुलते ही 5 मिनट में बिके 2 लाख बड्स

उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के बीच इन दिनों एक नई किस्म को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। शाहजहाँपुर स्थित उत्तर प्रदेश गन्ना अनुसंधान परिषद द्वारा विकसित नई किस्म CoS.23232 की ऑनलाइन बुकिंग 9 अक्टूबर 2026 को शुरू हुई और देखते ही देखते महज 5 मिनट के भीतर 2 लाख बड्स बुक हो गए। किसानों की इस भारी मांग ने यह साफ कर दिया है कि वे अब पुरानी किस्मों को छोड़कर ऐसी फसलों की तलाश में हैं जो बीमारियों से लड़ने में सक्षम हों और ज्यादा मुनाफा दें।
दरअसल, राज्य के गन्ना क्षेत्र में लंबे समय तक Co.0238 किस्म का दबदबा रहा, लेकिन 'लाल सड़न' (रेड रॉट) नामक बीमारी के नए स्ट्रेन CF13 ने इस किस्म को बुरी तरह प्रभावित किया। इसका असर यह हुआ कि राज्य का चीनी उत्पादन 2019-20 के 126.4 लाख टन से घटकर 2025-26 के सीजन में 89.5 लाख टन रह गया। इसी संकट को देखते हुए वैज्ञानिकों ने एक दशक की मेहनत के बाद CoS.23232 जैसी रोग-प्रतिरोधी और जल्दी पकने वाली किस्म तैयार की है।
पैदावार और चीनी की मात्रा में भारी बढ़त
परिषद के आंकड़ों के मुताबिक, नई किस्म CoS.23232 न केवल लाल सड़न रोग के खिलाफ मजबूत है, बल्कि इसकी पैदावार भी शानदार है। इसकी मुख्य फसल की औसत पैदावार 95.56 टन प्रति हेक्टेयर है, जो पुरानी किस्म Co.0238 के मुकाबले करीब 9.44 प्रतिशत अधिक है। वहीं, रatoon फसल में भी 3.16 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है।
चीनी की मात्रा के मामले में भी यह किस्म बाजी मार रही है। नवंबर में इसमें 13.10 प्रतिशत चीनी दर्ज की गई, जो जनवरी में बढ़कर 13.77 प्रतिशत और मार्च तक 14.05 प्रतिशत तक पहुंच गई। यह आंकड़े Co.0238 की तुलना में काफी बेहतर हैं।
परिषद के निदेशक अभिषेक आनंद ने बताया कि यह किस्म CoS.8119 (मादा) और Co.775 (नर) के मेल से तैयार की गई है। गन्ने की इस विविधता को बढ़ावा देने के लिए सरकार और परिषद मिलकर काम कर रहे हैं। गन्ना आयुक्त मिनीथी एस. के अनुसार, बीमारी को रोकने के लिए Co.0238 के क्षेत्रफल को घटाकर अब कुल क्षेत्र का केवल 29 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे लाल सड़न प्रभावित क्षेत्र 61,000 हेक्टेयर से घटकर अब करीब 6,372 हेक्टेयर रह गया है।
चूंकि शुरुआती बीज स्टॉक सीमित था, इसलिए कई किसान बुकिंग नहीं कर पाए। ऐसे किसानों के लिए परिषद अब सिंगल बड और टिश्यू कल्चर के जरिए बीज उत्पादन बढ़ा रही है। अक्टूबर में आयोजित होने वाले किसान मेलों में उन लोगों को मिनी सीड किट वितरित किए जाएंगे जो ऑनलाइन बुकिंग से चूक गए थे। राज्य की 120 चीनी मिलें भी इस नई किस्म के जल्दी पकने की खूबी से खुश हैं, क्योंकि इससे क्रशिंग शेड्यूल और रिकवरी रेट में सुधार होगा।