वोटर लिस्ट में 16.18 लाख 'रहस्यमयी' नामों का दावा गलत, यूपी CEO ने सोशल मीडिया की खबरों को नकारा

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिन्वा ने वोटर लिस्ट में 16.18 लाख आवेदनों के अचानक जुड़ने को लेकर चल रही खबरों और सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रांतियों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि राज्य में 88 लाख फॉर्म-6 आवेदन प्राप्त हुए थे, जबकि केवल 71.38 लाख की ही जानकारी दी गई, जिससे 16.18 लाख नामों के 'रहस्यमयी' तरीके से जुड़ने का सवाल उठा।
CEO नवदीप रिन्वा ने स्पष्ट किया कि इस मामले में कोई रहस्य नहीं है और चुनाव आयोग पूरी तरह पारदर्शी रहा है। उन्होंने बताया कि जिन 16.18 लाख आवेदनों की चर्चा हो रही है, वे ड्राफ्ट रोल प्रकाशित होने से पहले ही प्राप्त हो चुके थे। आयोग ने इस जानकारी को 6 जनवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और प्रेस रिलीज के जरिए पहले ही सार्वजनिक कर दिया था। इसके बाद 7 जनवरी से रोजाना बुलेटिन जारी कर यह बताया गया कि कितने आवेदन 6 जनवरी से पहले आए थे और कितने बाद में।
नियमों के मुताबिक ही हुई प्रक्रिया, भ्रम फैलाने की कोशिश
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कानून और नियमों के अनुसार, केवल उन्हीं फॉर्म-6 आवेदनों की सूची (फॉर्म-9) वेबसाइट पर प्रकाशित की जाती है जो 'दावा और आपत्ति' अवधि के दौरान प्राप्त होते हैं। जो आवेदन इस अवधि से पहले या बाद में आते हैं, उनके लिए वेबसाइट पर सूची प्रकाशित करने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है; उन्हें केवल नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित किया जाता है।
रिपोर्ट में उठाए गए इस सवाल पर कि ड्राफ्ट रोल आने से पहले लोग फॉर्म-6 कैसे भर सकते थे, CEO ने कहा कि यह जानकारी के अभाव के कारण पूछा गया सवाल है। उन्होंने समझाया कि जब बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर सर्वे करते हैं, तो वे उन लोगों को भी फॉर्म-6 उपलब्ध कराते हैं जो पात्र हैं लेकिन लिस्ट में शामिल नहीं हैं। इसी प्रक्रिया के तहत ये आवेदन प्राप्त हुए थे और सभी नियमों का सख्ती से पालन किया गया है।