यूपी कैबिनेट मीटिंग: शिक्षा कर्मियों को मिल सकती है कैशलेस इलाज की बड़ी सौगात
सीएम योगी की अध्यक्षता में यूपी कैबिनेट की अहम बैठक, 1.75 लाख शिक्षा कर्मियों को कैशलेस मेडिकल सुविधा मिलने की उम्मीद।

उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षा कर्मियों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी आने वाली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आज, मंगलवार 27 अक्टूबर 2026 को उनके आधिकारिक आवास 5 कालिदास मार्ग पर एक महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक होने जा रही है। सुबह 11 बजे शुरू होने वाली इस बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे से जुड़े करीब 16 से 21 बड़े नीतिगत प्रस्तावों पर मुहर लग सकती है।
इस बैठक का सबसे मुख्य एजेंडा शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को कैशलेस मेडिकल सुविधा देना है। प्रस्ताव के मुताबिक, माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभागों के तहत आने वाले सहायता प्राप्त (aided), गैर-सहायता प्राप्त (unaided) और संस्कृत स्कूलों के गैर-शिक्षण कर्मचारियों और उनके आश्रितों को इस सुविधा का लाभ दिया जा सकता है। माना जा रहा है कि इस पहल से लगभग 1.75 लाख कर्मचारी सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। रिपोर्टों के अनुसार, करीब 10 लाख शिक्षकों और कर्मचारियों को 5 लाख रुपये तक का मेडिकल कवरेज मिल सकता है। साथ ही, समग्र शिक्षा परियोजना के तहत काम करने वाले कर्मियों को भी इस योजना में शामिल करने की तैयारी है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीक पर भी रहेगा जोर
सिर्फ शिक्षा ही नहीं, बल्कि इस कैबिनेट बैठक में राज्य के विकास से जुड़े कई अन्य अहम मुद्दों पर भी चर्चा होगी। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए पीपीपी (PPP) मॉडल के जरिए चार 200 बेड वाले अस्पताल चलाने पर विचार कर रही है। तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए आईआईटी कानपुर के सहयोग से राज्य स्तरीय 'साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर' और एक समर्पित 'रोबोटिक्स पार्क' बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के लिए आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे और जेवर लिंक एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए डेवलपर्स के चयन पर भी मंजूरी मांगी जाएगी। इसके अलावा, पंचायती राज अधिनियम में संशोधन कर वोटर लिस्ट नामांकन को विनियमित करने और उत्तर प्रदेश पंचायती राज सामान्य निवास अवधारणा नियम-2026 को लागू करने पर भी विचार होगा।
बैठक के एजेंडे में उत्तर प्रदेश अंतर्देशीय पोत नियम-2026 के साथ-साथ आवास एवं शहरी नियोजन, परिवहन, न्याय, पशुपालन और सहकारिता जैसे विभिन्न विभागों के प्रस्ताव भी शामिल हैं, जो राज्य के प्रशासनिक और औद्योगिक ढांचे को नई दिशा दे सकते हैं।