प्रयागराज: TGT-PGT भर्ती नियमों के खिलाफ अभ्यर्थियों का हल्लाबोल, दूसरे दिन भी निदेशालय के बाहर डटे प्रदर्शनकारी
प्रयागराज में TGT-PGT अभ्यर्थियों का प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा। पुराने नियमों को बहाल करने की मांग को लेकर अभ्यर्थी शिक्षा निदेशालय के बाहर डटे हैं।

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में TGT-PGT भर्ती प्रदर्शन ने अब उग्र रूप ले लिया है। शिक्षा निदेशालय के बाहर अपनी मांगों को लेकर डटे अभ्यर्थियों का प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा। वाल्मीकि जयंती की सार्वजनिक छुट्टी होने के बावजूद अभ्यर्थी अपनी मांगों पर अड़े रहे और रात भर खुले आसमान के नीचे रहकर विरोध जताया। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए निदेशालय के मुख्य गेट पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
यह पूरा विवाद माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी नए विज्ञापन और उसमें किए गए नियमों के बदलावों को लेकर है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि विभाग ने भर्ती के नियमों और पैटर्न में ऐसे बदलाव किए हैं, जो उनके हितों के खिलाफ हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले उन्हें आश्वासन दिया था, लेकिन विभाग ने उसकी अनदेखी करते हुए नए नियम थोप दिए हैं।
पुराने नियमों की बहाली और TET की अनिवार्यता पर विवाद
अभ्यर्थियों की मुख्य मांग यह है कि भर्ती प्रक्रिया को पुराने नियमों और पिछले पैटर्न के आधार पर ही संचालित किया जाए। विवाद के केंद्र में TET की अनिवार्यता, B.Ed और नॉन-B.Ed उम्मीदवारों के लिए संशोधित शर्तें और आर्ट्स विषय के पाठ्यक्रम में किए गए बदलाव हैं। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे आशुतोष पांडेय और अन्य साथियों का कहना है कि जब मुख्यमंत्री ने NCTE को पत्र लिखने का वादा किया था, तब उन्होंने अपनी भूख हड़ताल खत्म की थी, लेकिन अब विभाग नए नियम लाकर उन्हें भ्रमित कर रहा है।
इस आंदोलन की पृष्ठभूमि काफी दर्दनाक रही है। जून 2026 में 23,775 से अधिक रिक्तियों को लेकर शुरू हुए इस संघर्ष में 21 सितंबर को विजय बहादुर नामक एक अभ्यर्थी की मृत्यु हो गई थी, जिसने इस आंदोलन की आग को और भड़का दिया। इसके बाद छात्रों का गुस्सा लखनऊ तक जा पहुंचा था।
इसी बीच, इस मुद्दे ने राजनीतिक मोड़ भी ले लिया है। 27 अक्टूबर को अभ्यर्थियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। अखिलेश यादव ने छात्रों के प्रति अपना समर्थन जताते हुए भरोसा दिलाया कि यदि उनकी पार्टी सरकार में आती है, तो अभ्यर्थियों के हितों की पूरी रक्षा की जाएगी। फिलहाल, प्रदर्शनकारी इस बात पर अड़े हैं कि जब तक सरकार भर्ती नियमों में बदलाव कर उनकी मांगें पूरी नहीं करती, उनका धरना समाप्त नहीं होगा।