132 साल बाद अपनी जड़ों की तलाश में गाजीपुर पहुंचे सूरीनाम का परिवार, पूर्वजों की यादें ताजा कीं

Shubham Singh15 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
132 साल बाद अपनी जड़ों की तलाश में गाजीपुर पहुंचे सूरीनाम का परिवार, पूर्वजों की यादें ताजा कीं

समय का पहिया जब घूमता है, तो वह अक्सर हमें उन रास्तों पर वापस ले आता है जहाँ से हमारा सफर शुरू हुआ था। कुछ ऐसा ही हुआ दक्षिण अमेरिकी देश सूरीनाम से आए एक परिवार के साथ, जो पूरे 132 साल बाद अपनी जड़ों और पूर्वजों की तलाश में उत्तर प्रदेश के गाजीपुर पहुंचा है। जॉन मोहनलाल रमनंदनलाल और शारदा रमनंदनलाल अपने परिवार के साथ गाजीपुर के खानपुर गांव और वाराणसी पहुंचे, ताकि वे अपने 70 वर्षीय पिता के जीवन भर के सपने को पूरा कर सकें।

गिरमिटिया मजदूर बनकर गए थे पूर्वज, अब DNA से खोज रहे रिश्ते

इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि इस परिवार के पूर्वज रमनंदन और उनकी पत्नी राजवंतिया गाजीपुर जिले के सैदपुर थाना क्षेत्र के खानपुर गांव के निवासी थे। रमनंदन और राजवंतिया कायस्थ समुदाय से ताल्लुक रखते थे। 25 अगस्त 1894 को वे 'एमेस' नामक एक ब्रिटिश जहाज से कलकत्ता के रास्ते सूरीनाम के लिए रवाना हुए थे। उस समय रमनंदन की उम्र महज 24 साल और राजवंतिया की उम्र 22 साल थी। वे गिरमिटिया मजदूरों के तौर पर वहां गए थे।

करीब 89 दिनों के लंबे और कठिन समुद्री सफर के बाद, 22 नवंबर 1894 को वे सूरीनाम के पारामारिबो पहुंचे, जहाँ उन्हें निकेरी जिले के 'वाटरलू' प्लांटेशन में काम मिला। सूरीनाम में बसने के बाद 20 दिसंबर 1911 को रमनंदन और राजवंतिया का आधिकारिक विवाह हुआ। परिवार की अगली पीढ़ी में उनके बेटे जयकरम ने 15 अक्टूबर 1934 को 'रमनंदनलाल' उपनाम अपनाया, जिसे आज की पीढ़ी भी गर्व से ढो रही है।

सूरीनाम में बसे इस परिवार के पास अपने पूर्वजों के बारे में बहुत कम जानकारी थी, लेकिन परिवार के बुजुर्ग की दिली ख्वाहिश थी कि वे एक बार अपनी मिट्टी को अपनी आंखों से देखें। डॉ. पवन और अन्य संपर्कों की मदद से यह परिवार पहले बनारस पहुंचा और फिर गाजीपुर के खानपुर गांव गया, जहाँ उन्होंने स्थानीय लोगों से मुलाकात की।

अपनी जड़ों की वैज्ञानिक पुष्टि करने के लिए परिवार ने 'ज्ञान लैब' के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे को अपने DNA नमूने भी सौंपे हैं। अब इस परिवार को उम्मीद है कि DNA टेस्ट के नतीजों के बाद वे पूर्वी उत्तर प्रदेश और गाजीपुर में अपने खून के रिश्तेदारों को खोजने में कामयाब होंगे और अपने वंश की वैज्ञानिक पुष्टि कर सकेंगे।

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