पत्रकार अभिषेक उपाध्याय मामला: सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया गाजियाबाद पुलिस का X नोटिस

Shubham Singh15 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
पत्रकार अभिषेक उपाध्याय मामला: सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया गाजियाबाद पुलिस का X नोटिस

देश की सर्वोच्च अदालत ने एक बड़े फैसले में वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के डिजिटल डेटा की मांग को लेकर गाजियाबाद पुलिस द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) को जारी किए गए नोटिस को रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की इस कार्रवाई को 'ओवरकिल' करार देते हुए स्पष्ट किया कि जांच के नाम पर किसी व्यक्ति की निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं किया जा सकता।

पूरा मामला 18 अगस्त 2026 को हुए एक कथित रोड रेज हादसे से जुड़ा है। गाजियाबाद पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 94 का हवाला देते हुए 'X' से पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के 1 जून 2026 से 22 अगस्त 2026 तक के व्यापक डिजिटल रिकॉर्ड्स की मांग की थी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने इस मांग को बेहद ज्यादा बताया। कोर्ट ने कहा कि किसी कथित घटना से कई महीने पहले के कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा मांगना जांच शक्तियों का अत्यधिक प्रयोग है।

निजता के अधिकार और पुलिस की शक्तियों पर कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने आईटी नियमों का हवाला देते हुए पुलिस की कार्रवाई का बचाव किया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य की जांच शक्तियों और उनके क्रियान्वयन के तरीके के बीच एक स्पष्ट अंतर बताया। अदालत ने जोर देकर कहा कि जब तक अन्य विकल्प अपर्याप्त साबित न हों, तब तक किसी की व्यक्तिगत या गोपनीय जानकारी तक पहुंच नहीं बनाई जा सकती। कोर्ट ने विशेष रूप से खोजी पत्रकारों के निजता के अधिकारों और राज्य की जांच प्रक्रियाओं के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की ओर से पेश अधिवक्ताओं, प्रदीप राय और अनूप प्रकाश अवस्थी ने तर्क दिया कि यह एफआईआर उनके द्वारा अयोध्या राम मंदिर में दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं की रिपोर्टिंग के बदले में दर्ज कराई गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने न केवल पुलिस के नोटिस को रद्द किया, बल्कि अभिषेक उपाध्याय को गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा को स्थायी कर दिया है। इसके साथ ही, अदालत ने गाजियाबाद पुलिस को आदेश दिया है कि उपाध्याय का जब्त किया गया वाहन दो दिनों के भीतर उन्हें वापस सौंपा जाए। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस नोटिस के जरिए या किसी अन्य तरीके से प्राप्त किसी भी जानकारी का उपयोग उपाध्याय के खिलाफ नहीं किया जाएगा।

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