सुल्तानपुर: सिंगर संजय यादव के घर दीवार फांदकर घुसी पुलिस, वीडियो वायरल होने के बाद मचा बवाल

सुल्तानपुर: सिंगर संजय यादव के घर दीवार फांदकर घुसी पुलिस, वीडियो वायरल होने के बाद मचा बवाल

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में पुलिस की एक कार्रवाई ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। मशहूर अवधी गायक और कॉमेडियन संजय यादव (संजय यदुवंशी) के घर पर पुलिस ने जिस तरह से छापेमारी की, उसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। मामला तब बिगड़ गया जब धम्मौर पुलिस स्टेशन की टीम ने घर के दरवाजे बंद होने पर दीवार फांदकर अंदर घुसने की कोशिश की।

घटना सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 की रात की है। पुलिस टीम उघारपुर स्थित संजय यादव के आवास पर पहुंची थी। घर के अंदर संजय यादव मौजूद नहीं थे और दरवाजे बंद थे। इसके बाद पुलिस अधिकारियों ने परिसर की दीवार फांदकर अंदर प्रवेश किया, जिससे वहां मौजूद संजय के पिता सियाराम और भाई शिवा यादव भड़क गए। दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई, जिसका वीडियो अब इंटरनेट पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि इस दौरान धम्मौर थाने के एक इंस्पेक्टर ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।

पुलिस की कार्रवाई और कानूनी दांव-पेच

इस पूरी घटना के बाद संजय यादव ने फेसबुक पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने पुलिस की इस कार्रवाई की legality पर सवाल उठाते हुए पूछा कि बिना किसी गिरफ्तारी वारंट के यह छापेमारी कैसे की गई? उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या उन पर अपहरण या हत्या जैसे किसी गंभीर अपराध का आरोप है, जिसके लिए पुलिस ने ऐसा तरीका अपनाया।

दूसरी ओर, पुलिस ने इन सभी आरोपों को 'झूठा और निराधार' बताया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि यह एक कानूनी कार्रवाई थी क्योंकि संजय यादव कई मामलों में वांछित हैं। पुलिस के अनुसार, उन पर निम्नलिखित मामले दर्ज हैं:

  • 9 सितंबर 2026 को शबीब रजा नामक युवक के साथ कथित मारपीट का मामला।
  • अप्रैल 2026 का एक मामला, जिसमें उनके यूट्यूब वीडियो में राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने का आरोप है।

इतना ही नहीं, पुलिस ने यह भी बताया कि संजय के भाई शिवा यदुवंशी के खिलाफ कोतवाली नगर थाने में एक अलग मामला दर्ज है और उनकी गिरफ्तारी की कोशिशें जारी हैं।

कानूनी जानकारों का कहना है कि हालांकि गंभीर अपराधों में पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तारी कर सकती है, लेकिन BNSS की धारा 185 और धारा 103 के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य होता है, जिसमें दो स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी जरूरी होती है। फिलहाल, पुलिस के व्यवहार को लेकर जनता में आक्रोश है और इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।

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