दिवाली से पहले यूपी में चीनी के दाम आसमान पर, कानपुर-आगरा में बढ़ी कीमतें

Shubham Singh14 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
दिवाली से पहले यूपी में चीनी के दाम आसमान पर, कानपुर-आगरा में बढ़ी कीमतें

दिवाली का त्योहार नजदीक है, लेकिन उत्तर प्रदेश के बाजारों में चीनी की कीमतों ने आम आदमी और मिठाई व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। उत्तर प्रदेश में चीनी की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे त्योहार की तैयारियों के बीच रसोई का बजट बिगड़ गया है। कानपुर जैसे बड़े शहरों में रिटेल कीमतें 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं, जबकि आगरा में भी यह 62 रुपये प्रति किलो के स्तर पर है।

बाजार की इस तेजी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 6 से 12 अक्टूबर के बीच मिलों से निकलने वाली चीनी की कीमतों में 13% का उछाल आया है। यह दर 4,600 रुपये से बढ़कर 5,200 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। कानपुर के थोक बाजार में कीमतें 6,000 रुपये प्रति क्विंटल के पार निकल गई हैं, जो सितंबर के अंत में महज 5,400 से 5,500 रुपये के बीच थीं।

कालाबाजारी और सप्लाई की कमी का आरोप

चीनी की इस बढ़ती कीमतों के पीछे केवल मांग ही नहीं, बल्कि कुछ गंभीर आरोप भी हैं। आगरा खंडासरी एंड शुगर डीलर्स एसोसिएशन के गिरिराज अग्रवाल का कहना है कि चीनी मिलों की मनमानी और जमाखोरी की वजह से बाजार में कृत्रिम कमी पैदा की जा रही है। वहीं, कानपुर शुगर मर्चेंट्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर इस स्थिति में हस्तक्षेप करने और कालाबाजारी रोकने की मांग की है। उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष अविनाश त्रिपाठी ने बताया कि मिठाई बनाने वालों के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई है।

सप्लाई में कमी के कई कारण सामने आए हैं। 2026-27 सीजन के लिए गन्ने की बुवाई में 1.6% की गिरावट आई है और पेराई का सीजन भी देरी से शुरू होने की उम्मीद है, जो अब नवंबर तक ही बड़े पैमाने पर शुरू होगा। राष्ट्रीय स्तर पर भी अधिक बारिश और बीमारियों की वजह से चीनी उत्पादन का अनुमान घटाकर 30.6 मिलियन टन कर दिया गया है।

बाजार को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने कुछ कड़े कदम उठाए हैं:

  • डीलरों के लिए 30 नवंबर तक 1,000 क्विंटल की स्टॉक सीमा तय की गई है।
  • अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े के लिए उत्तर प्रदेश को 4.51 लाख टन चीनी आवंटित की गई है।
  • कीमतों को रोकने के लिए 10 लाख टन कच्चे चीनी के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी गई है।

दूसरी ओर, किसान अपनी मांगों पर अड़े हैं। वे गन्ने के राज्य सलाह मूल्य (SAP) को बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल और चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) को 31 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलो करने की मांग कर रहे हैं। सरकार की कोशिशों के बावजूद, 8 नवंबर को आने वाली दिवाली तक कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहने की आशंका है।

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