ताजमहल के गेट पर आवारा पशुओं का कब्जा, पर्यटकों की सुरक्षा खतरे में
ताज महल के प्रवेश द्वारों पर आवारा सांडों के जमावड़े से पर्यटकों की सुरक्षा खतरे में है। प्रशासन की लापरवाही से अंतरराष्ट्रीय छवि पर असर।
दुनिया के सात अजूबों में शुमार आगरा का ताजमहल इन दिनों अपनी खूबसूरती के साथ-साथ एक गंभीर समस्या से जूझ रहा है। स्मारक के प्रवेश द्वारों के आसपास आवारा सांडों और पशुओं के झुंडों ने डेरा डाल रखा है, जिससे यहां आने वाले पर्यटकों, खासकर महिलाओं और बच्चों में डर का माहौल है। स्थिति यह है कि सैलानियों को इन जानवरों से बचने के लिए अपने रास्ते बदलने पड़ रहे हैं या बेहद सावधानी से आगे बढ़ना पड़ रहा है।
हैरानी की बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर इस जगह पर बुनियादी प्रबंधन की ऐसी कमी दिख रही है। इन पशुओं को पकड़कर कांजी हाउस भेजने की जिम्मेदारी आगरा नगर निगम (AMC) की है, जो जिला प्रशासन और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के साथ मिलकर काम करता है। हालांकि, यह समस्या पुरानी है और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है।
अस्थायी समाधान और प्रशासन की चुनौती
अक्सर देखा गया है कि जब जी-20 जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन होते हैं या किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष का दौरा होता है, तब प्रशासन आनन-फानन में सफाई अभियान चलाकर पशुओं को हटा देता है। लेकिन ये कोशिशें केवल दिखावा साबित होती हैं और कुछ समय बाद स्थिति फिर वैसी ही हो जाती है। इस समस्या की एक बड़ी वजह पशु मालिकों की लापरवाही है, जो दूध देना बंद करने के बाद जानवरों को सड़कों पर लावारिस छोड़ देते हैं। साथ ही, मौजूदा पशु आश्रय स्थलों में क्षमता की भारी कमी है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही निर्देश दिए थे कि नगर निकाय सार्वजनिक स्थानों, अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और विरासत स्थलों से आवारा पशुओं और कुत्तों को हटाकर सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करें। इसके बावजूद, ताजमहल जैसे वैश्विक केंद्र पर यह समस्या बरकरार है। स्थानीय व्यापारिक संगठनों और पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि आवारा पशुओं की यह मौजूदगी शहर की अंतरराष्ट्रीय छवि को धूमिल कर रही है। फिलहाल, लोग प्रशासन से किसी ठोस और स्थायी समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं।