सीतापुर: मतदान केंद्र पर झंडा लगाने को लेकर हंगामा, पूर्व सपा विधायक ने पुलिस पर लगाया पक्षपात का आरोप

सीतापुर में एमएलसी चुनाव के दौरान झंडे लगाने को लेकर सपा कार्यकर्ताओं और पुलिस में विवाद। पूर्व विधायक ने लगाया पक्षपात का आरोप।

Sushant Singh23 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
सीतापुर: मतदान केंद्र पर झंडा लगाने को लेकर हंगामा, पूर्व सपा विधायक ने पुलिस पर लगाया पक्षपात का आरोप

उत्तर प्रदेश में एमएलसी चुनाव के बीच सीतापुर के खैराबाद बूथ पर उस समय माहौल गरमा गया, जब समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी झड़प हो गई। विवाद की जड़ पार्टी का झंडा लगाना था, जिसे लेकर पुलिस ने सपा कार्यकर्ताओं को रोका, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया। इस घटना के बाद पूर्व सपा विधायक राधेश्याम जायसवाल ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि चुनाव प्रक्रिया में पुलिस का रवैया निष्पक्ष नहीं है।

पूर्व विधायक राधेश्याम जायसवाल ने खुले तौर पर पुलिस पर पक्षपात करने का आरोप लगाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि एक तरफ जहां समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को झंडा लगाने से रोका जा रहा है और उन पर कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को झंडे लगाने की छूट क्यों दी जा रही है? जायसवाल का दावा है कि प्रशासन केवल एक पक्ष के प्रति सख्ती बरत रहा है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है।

चुनाव आयोग में शिकायत और नियमों का टकराव

गौरतलब है कि यह विवाद केवल सीतापुर तक सीमित नहीं है। समाजवादी पार्टी ने चुनाव आयोग में कई जिलों में अनियमितताओं की शिकायत दर्ज कराई है। पार्टी का आरोप है कि वोटर लिस्ट में छेड़छाड़, स्याही लगाने में लापरवाही और मतदान केंद्रों के पास आचार संहिता के उल्लंघन जैसी घटनाएं हो रही हैं।

दूसरी ओर, नियमों की बात करें तो चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, मतदान केंद्र के 100 मीटर के दायरे में किसी भी तरह का प्रचार करना या राजनीतिक प्रतीकों का प्रदर्शन करना आचार संहिता का उल्लंघन माना जाता है। इसी नियम के तहत पुलिस कार्रवाई करती है, लेकिन राजनीतिक दलों के बीच इस बात को लेकर खींचतान मची है कि इन नियमों को समान रूप से लागू किया जा रहा है या नहीं।

इसी तरह की खबरें कौशाम्बी से भी आई थीं, जहां भाजपा जिला अध्यक्ष धर्मराज मौर्य ने आरोप लगाया था कि सपा समर्थकों को झंडे लगी गाड़ियों के साथ मतदान केंद्र के भीतर जाने की अनुमति दी गई। फिलहाल, सीतापुर की इस घटना ने एक बार फिर चुनावी माहौल में तनाव बढ़ा दिया है और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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