सीतापुर: टैक्स वसूली में गड़बड़ी, पूर्व ईओ वैभव त्रिपाठी के निलंबन की सिफारिश

Shubham Singh15 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में प्रशासनिक लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं का एक बड़ा मामला सामने आया है। जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) डॉ. राजगणपति आर. ने पूर्व अधिशासी अधिकारी (ईओ) वैभव त्रिपाठी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उनके निलंबन और अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है। मामला सरकारी नियमों को ताक पर रखकर एक निजी फर्म को प्रॉपर्टी टैक्स वसूली का कॉन्ट्रैक्ट देने से जुड़ा है।

जांच में यह बात सामने आई है कि वैभव त्रिपाठी ने अपने कार्यकाल के दौरान लखनऊ की एक कंपनी 'ज्ञान जियोमैटिक्स प्राइवेट लिमिटेड' को प्रॉपर्टी टैक्स वसूलने का काम सौंपा था। चौंकाने वाली बात यह है कि इस कॉन्ट्रैक्ट के लिए नगर पालिका बोर्ड से अनिवार्य मंजूरी तक नहीं ली गई थी। इस समझौते के तहत, सॉफ्टवेयर के जरिए वसूली गई कुल टैक्स राशि का 12.5 प्रतिशत हिस्सा उस निजी फर्म को दिए जाने का प्रावधान था।

नियमों की अनदेखी और आखिरी दिन का खेल

डीएम की रिपोर्ट के अनुसार, टैक्स वसूली का ऐसा भुगतान ढांचा राज्य के नियमों के विरुद्ध है और उत्तर प्रदेश की किसी भी अन्य नगर पालिका में इस तरह की व्यवस्था लागू नहीं है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के पास पहले से ही 'ई-नगर सेवा पोर्टल' मौजूद है, जिससे डेटा कलेक्शन का काम होता है, ऐसे में निजी फर्म को कॉन्ट्रैक्ट देना पूरी तरह अनावश्यक था।

इस मामले में सबसे हैरान करने वाला मोड़ तब आया जब यह पता चला कि वैभव त्रिपाठी ने 1 जून 2026 को इस फर्म को वर्क ऑर्डर जारी किया। यह वही दिन था जब उनका सीतापुर से तबादला हो गया था और वे अपनी ड्यूटी से मुक्त हो रहे थे। वर्तमान में उनकी तैनाती गाजियाबाद की लोनी नगर पालिका में है।

जिला मजिस्ट्रेट ने इस पूरी घटना को अनुशासनहीनता और सरकारी निर्देशों का जानबूझकर किया गया उल्लंघन माना है। इस संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट शहरी विकास विभाग के प्रमुख सचिव और निकाय निदेशालय के निदेशक को भेज दी गई है, ताकि दोषी अधिकारी पर सख्त कार्रवाई की जा सके।

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