सीतापुर: पूर्व ईओ वैभव त्रिपाठी के निलंबन की सिफारिश, टैक्स वसूली में बड़ा फर्जीवाड़ा
उत्तर प्रदेश के सीतापुर में प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। जिला मजिस्ट्रेट डॉ. राजा गणपति आर ने नगर पालिका परिषद के पूर्व अधिशासी अधिकारी (EO) वैभव त्रिपाठी के खिलाफ निलंबन और सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की औपचारिक सिफारिश की है। यह पूरा मामला प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली में हुई गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं से जुड़ा है, जिसने शासन का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
पूरा मामला तब सामने आया जब जांच में पता चला कि वैभव त्रिपाठी ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिन कुछ ऐसे फैसले लिए, जो नियमों के पूरी तरह खिलाफ थे। त्रिपाठी का तबादला 31 मई 2026 को गाजियाबाद की लोनी नगर पालिका में हो गया था, लेकिन सीतापुर से कार्यमुक्त होने के ठीक अगले दिन यानी 1 जून 2026 को उन्होंने एक बड़ा खेल खेला। उन्होंने नगर पालिका बोर्ड की आवश्यक अनुमति के बिना लखनऊ की एक प्राइवेट फर्म 'ज्ञान जियोमेटिक्स प्राइवेट लिमिटेड' को प्रॉपर्टी टैक्स वसूली का कॉन्ट्रैक्ट सौंप दिया।
बिना मंजूरी के प्राइवेट फर्म को दिया कमीशन का लालच
प्रशासनिक रिपोर्ट के मुताबिक, यह कॉन्ट्रैक्ट केवल काम देने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें फर्म को वसूली गई कुल टैक्स राशि पर 12.5 प्रतिशत कमीशन देने का प्रावधान किया गया था। जांच अधिकारियों ने पाया कि इस तरह का वित्तीय प्रावधान नगर पालिका के नियमों के विपरीत है और प्रदेश की किसी अन्य शहरी निकाय में भी ऐसा नहीं देखा गया है।
डीएम ने अपनी रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया है कि जब नगर पालिका के पास टैक्स वसूली के लिए अपना स्टाफ मौजूद है और राज्य स्तर पर 'ई-नगर सेवा पोर्टल' पहले से ही काम कर रहा है, तो फिर एक प्राइवेट फर्म को यह काम सौंपना मिलीभगत की ओर इशारा करता है। हालांकि अप्रैल और मई 2026 में टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई थी जिसमें यह फर्म सबसे कम बोली लगाने वाली (L1) पाई गई थी, लेकिन बोर्ड की मंजूरी के बिना अंतिम दिन वर्क ऑर्डर जारी करना सरकारी आदेशों का खुला उल्लंघन और घोर अनुशासनहीनता माना गया है।
जिला मजिस्ट्रेट ने इस संबंध में 15 अक्टूबर 2026 को शहरी विकास विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल राज्य स्तर पर इस सिफारिश पर विचार किया जा रहा है और स्थानीय प्रशासन मामले की गहन समीक्षा कर रहा है।