शाहजहाँपुर नगर निगम में EV खरीद पर बवाल, बिना चार्जिंग स्टेशन के हुआ लाखों का भुगतान

उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर नगर निगम में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की खरीद और उनके चार्जिंग भुगतान को लेकर वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि निगम ने भारी-भरकम रकम खर्च कर गाड़ियां तो खरीद लीं, लेकिन उन्हें चलाने के लिए बुनियादी सुविधाएं तक मौजूद नहीं थीं। अब इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार की बू आ रही है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के मुताबिक, मई 2025 में नगर निगम ने 'फ्लाई इंफ्राटेक' कंपनी से करीब 1.49 करोड़ रुपये की लागत से 10 इलेक्ट्रिक वाहन खरीदे थे। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी राशि खर्च करने के बावजूद ये गाड़ियां सड़कों पर उतरने के बजाय धूल फांक रही हैं। इस्तेमाल न होने के कारण वाहन अब खराब होने लगे हैं। मामला यहीं नहीं रुकता, निगम ने कंपनी को चार्जिंग सेवाओं के नाम पर लगभग 8.85 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया, जबकि खरीद के समय वहां कोई कार्यात्मक चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध ही नहीं था।
अधिकारियों की चुप्पी और मंत्री का हस्तक्षेप
इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए नगर आयुक्त सौम्या गुरुरानी ने फ्लाई इंफ्राटेक और संबंधित अधिकारियों से बिंदुवार स्पष्टीकरण मांगा था। जांच में मुख्य रूप से यह जानने की कोशिश की जा रही है कि बिना चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के वाहनों की खरीद की अनुमति किसने दी, चार्जिंग के पैसे किस आधार पर दिए गए और इन वाहनों को वार्डों में संचालित क्यों नहीं किया गया।
हैरानी की बात यह है कि स्पष्टीकरण मांगे 15 दिन बीत जाने के बाद भी अब तक कोई जवाब नहीं आया है और न ही किसी दोषी अधिकारी पर कार्रवाई हुई है। बताया जा रहा है कि फ्लाई इंफ्राटेक कंपनी के संबंध नगर निगम से काफी गहरे हैं और कंपनी अब तक निगम के लगभग 20 करोड़ रुपये के काम कर चुकी है।
इस पूरे प्रकरण ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री और स्थानीय विधायक सुरेश खन्ना ने इस मामले का संज्ञान लिया है। वहीं, नगर आयुक्त सौम्या गुरुरानी ने साफ किया है कि यदि तय समय सीमा के भीतर जवाब नहीं मिलता है, तो वह मंगलवार को फाइलों की समीक्षा करेंगी और नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।