शाहजहाँपुर नगर निगम की बड़ी लापरवाही: बिना चार्जिंग स्टेशन खरीदे करोड़ों के इलेक्ट्रिक वाहन, अब जांच शुरू
शाहजहाँपुर नगर निगम ने बिना चार्जिंग स्टेशन के करोड़ों के इलेक्ट्रिक वाहन खरीदे, जो 4 साल तक कबाड़ बने रहे। अब भुगतान पर छिड़ा विवाद।

उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में नगर निगम की एक ऐसी लापरवाही सामने आई है, जिसने सरकारी धन के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला 1.5 करोड़ रुपये की लागत से खरीदे गए इलेक्ट्रिक वाहनों का है, जिन्हें बिना किसी चार्जिंग बुनियादी ढांचे (Charging Infrastructure) के खरीद लिया गया। नतीजा यह हुआ कि ये वाहन पिछले करीब चार सालों से बिना चले कबाड़ में तब्दील हो रहे थे।
जानकारी के मुताबिक, ये वाहन कोतवाली तिलहर क्षेत्र के नगरिया चौकी के अंतर्गत आने वाले AKC मोटर्स के परिसर में खड़े थे। कंपनी का दावा है कि साल 2022 से नगर निगम के इलेक्ट्रिक और डीजल वाहन उनकी फैसिलिटी में पार्क थे। इलेक्ट्रिक गाड़ियां इसलिए नहीं चल सकीं क्योंकि शहर में उनके लिए चार्जिंग स्टेशन ही नहीं थे, वहीं डीजल वाहनों में तकनीकी खराबी के कारण वे बेकार पड़े रहे।
पैसे के विवाद और पुलिस की कार्रवाई ने बढ़ाया तनाव
इस पूरे मामले में अब भुगतान को लेकर विवाद गहरा गया है। AKC मोटर्स के प्रबंधन का कहना है कि नगर निगम पर पार्किंग शुल्क, रखरखाव और चार्जिंग से संबंधित लगभग 30 लाख रुपये का बकाया है। कंपनी का आरोप है कि उन्होंने कई बार नगर निगम के अधिकारियों से संपर्क किया और भुगतान की मांग की, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
विवाद तब और बढ़ गया जब 24 अक्टूबर को नगर निगम की एक टीम भारी पुलिस बल के साथ AKC मोटर्स के परिसर में पहुंची और बिना किसी पूर्व सूचना के सभी वाहनों को वहां से हटा लिया। कंपनी संचालकों का कहना है कि उन्हें इस कार्रवाई की जानकारी नहीं दी गई और न ही भुगतान विवाद को सुलझाने का कोई मौका दिया गया।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बिना चार्जिंग स्टेशन की योजना बनाए करोड़ों रुपये के इलेक्ट्रिक वाहन क्यों खरीदे गए? इन वाहनों के चार साल तक बेकार पड़े रहने की जिम्मेदारी किसकी है? इस पूरे मामले पर जब नगर आयुक्त सौम्या गुरुरानी से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। फिलहाल, खरीद प्रक्रिया और भुगतान विवाद की पूरी जांच होनी बाकी है।