शाहजहाँपुर जिला जेल में कानूनी जागरूकता शिविर, कैदियों को बताए गए उनके अधिकार

Shubham Singh13 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
शाहजहाँपुर जिला जेल में कानूनी जागरूकता शिविर, कैदियों को बताए गए उनके अधिकार

शाहजहाँपुर जिला जेल में मंगलवार को एक मासिक कानूनी साक्षरता और जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस खास पहल का मकसद जेल में बंद कैदियों को कानून की बारीकियों से अवगत कराना और उन्हें उनके मौलिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती अपेक्षा सिंह ने की, जिन्होंने कैदियों को न्यायिक प्रक्रियाओं और कानूनी अधिकारों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

शिविर को संबोधित करते हुए सचिव अपेक्षा सिंह ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रणाली का मुख्य उद्देश्य हर व्यक्ति को निष्पक्ष, सुलभ और समयबद्ध न्याय दिलाना है। उन्होंने प्ली बारगेनिंग (Plea Bargaining) के महत्व पर जोर देते हुए बताया कि यह आपराधिक न्याय प्रणाली का एक अहम हिस्सा है। इसके जरिए पात्र आरोपी स्वेच्छा से अपना अपराध स्वीकार कर अपने मामलों का जल्द निपटारा कर सकते हैं, बशर्ते इसमें आरोपी की स्वतंत्र सहमति हो और अदालत संतुष्ट हो। उन्होंने कैदियों से अपील की कि वे अपने कानूनी अधिकारों को जानें और सरकार द्वारा दी जाने वाली मुफ्त कानूनी सहायता सेवाओं का लाभ उठाएं।

कानूनी सहायता और विवाद निपटारे की मिली जानकारी

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विशेषज्ञों ने कैदियों की शंकाओं का समाधान किया और उन्हें प्रक्रिया समझाई:

  • दिनेश मिश्रा (एलएडीसीएस प्रमुख): उन्होंने प्ली बारगेनिंग के लिए पात्रता मानदंड और आवेदन की पूरी प्रक्रिया समझाई।
  • विवेक शर्मा (डिप्टी चीफ): उन्होंने मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त करने के तरीकों और न्यायिक अधिकारों पर रोशनी डाली।
  • मनोज मिश्रा (विशेष मध्यस्थ): उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया में संवाद, आपसी सहमति और पीड़ितों के हितों की रक्षा के महत्व पर चर्चा की।
  • डी.के. श्रीवास्तव (विशेष मध्यस्थ): उन्होंने कानूनी और सौहार्दपूर्ण तरीके से विवादों को सुलझाने के फायदों के बारे में बताया।

जेल अधीक्षक जे.पी. तिवारी ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के नियमित शिविर कैदियों को उनके अधिकारों से परिचित कराने और न्याय तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। शिविर का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि कानूनी जागरूकता ही सुलभ न्याय की बुनियाद है और हर बंदी को कानून द्वारा दिए गए अधिकारों का उपयोग करना चाहिए।

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