शाहजहाँपुर: अवैध एक्स-रे सेंटरों में सुरक्षा नियमों की धज्जियां, रेडिएशन बना 'साइलेंट पॉइजन'

उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर लोगों की जान के साथ खिलवाड़ हो रहा है। जिले के विभिन्न इलाकों और जलालाबाद जैसे छोटे कस्बों में चल रहे कई एक्स-रे सेंटर परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) के सुरक्षा मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज कर रहे हैं। इन केंद्रों में रेडिएशन सुरक्षा के बुनियादी इंतजाम न होने के कारण मरीजों के साथ-साथ आसपास के लोगों के लिए भी गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
नियमों के मुताबिक, एक्स-रे रूम की दीवारें नौ इंच की ठोस ईंटों की होनी चाहिए या उनमें लेड लाइनिंग होनी चाहिए, साथ ही कमरे का आकार कम से कम 18 वर्ग मीटर होना चाहिए। लेकिन हकीकत यह है कि यहाँ छोटे और तंग कमरों में मशीनें लगाई गई हैं, जिनमें रेडिएशन रोकने के लिए कोई उचित शील्डिंग नहीं है। इसका सीधा मतलब यह है कि रेडिएशन केवल मरीज तक सीमित नहीं रहता, बल्कि गलियारों और बगल के कमरों में मौजूद लोगों तक भी पहुँच रहा है।
सुरक्षा उपकरणों की कमी और लापरवाही
हैरानी की बात यह है कि इन केंद्रों पर काम करने वाले तकनीशियन भी सुरक्षा उपकरणों के बिना ही काम कर रहे हैं। लेड एप्रन, थायराइड शील्ड और रेडिएशन मॉनिटरिंग के लिए जरूरी TLD बैज का यहाँ नामोनिशान नहीं है। इतना ही नहीं, एक्स-रे चलते समय जलने वाली लाल चेतावनी लाइटें या तो खराब हैं या बिजली बचाने के चक्कर में बंद रखी जाती हैं, जिससे मरीज अनजाने में रेडिएशन के बीच कमरे में दाखिल हो जाते हैं।
मेडिकल विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बिना सुरक्षा के इस आयनकारी रेडिएशन के संपर्क में आने से डीएनए म्यूटेशन, कैंसर, मोतियाबिंद और त्वचा संबंधी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। यह स्थिति गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए किसी 'साइलेंट पॉइजन' से कम नहीं है।
बताया जा रहा है कि कई सेंटर बिना किसी आधिकारिक लाइसेंस या eLORA पोर्टल की मंजूरी के, किराए की जगहों पर मशीनें लगाकर अवैध रूप से चल रहे हैं। इस गंभीर मुद्दे को उठाते हुए धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने प्रशासन से जलालाबाद कस्बे में चल रही इन अवैध एक्स-रे दुकानों की तत्काल जांच की मांग की है। अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग और AERB के अधिकारी किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार करते हैं या इन खतरनाक केंद्रों पर कार्रवाई करते हैं।