यूपी में गिरते तापमान के साथ मौसमी बीमारियों का हमला, बच्चों के लिए डॉक्टरों ने जारी किया अलर्ट
उत्तर प्रदेश में गिरते तापमान के साथ सर्दी-जुकाम और वायरल बुखार के मामले बढ़े। डॉक्टरों ने बच्चों की देखभाल के लिए जारी की विशेष गाइडलाइंस।

उत्तर प्रदेश में मौसम के बदलते मिजाज और गिरते तापमान ने लोगों की सेहत बिगाड़ना शुरू कर दिया है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में सर्दी, खांसी, बुखार और वायरल इन्फेक्शन के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। स्थिति यह है कि अस्पतालों के ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है, जिससे स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है।
ताजा आंकड़ों पर नजर डालें तो चंदौली जैसे जिलों में हालात काफी गंभीर हैं, जहां सरकारी अस्पतालों के ओपीडी में रोजाना 800 से 1,000 तक मरीज पहुंच रहे हैं। लोग मुख्य रूप से सांस संबंधी समस्याओं और तेज बुखार की शिकायत लेकर आ रहे हैं। महोबा के सरकारी महिला अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. एस.के. चतुर्वेदी ने बताया कि मौसम में आए इस उतार-चढ़ाव की वजह से न केवल वायरल बुखार, बल्कि त्वचा से जुड़ी बीमारियों (डर्मेटोलॉजिकल शिकायतें) के मामले भी बढ़े हैं।
बच्चों और नवजातों की देखभाल के लिए जरूरी टिप्स
डॉक्टरों ने विशेष रूप से छोटे बच्चों और नवजातों के प्रति सावधानी बरतने की सलाह दी है। डॉ. चतुर्वेदी के अनुसार, इस मौसम में बच्चों की सेहत के साथ लापरवाही भारी पड़ सकती है। उन्होंने अभिभावकों के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए हैं:
- ठंडी हवाओं से बचाव: छोटे बच्चों और शिशुओं को सीधी ठंडी हवाओं के संपर्क में आने से बचाएं।
- सही पहनावा: बच्चों को मौसम के अनुसार पर्याप्त गर्म कपड़े पहनाएं। बाहर निकलते समय उनके सिर, कान और शरीर को पूरी तरह ढक कर रखें।
- बाहर जाने से परहेज: सुबह और शाम के समय, जब ठंड ज्यादा होती है, बच्चों को अनावश्यक रूप से बाहर न ले जाएं।
- साफ-सफाई का ध्यान: घर के वातावरण को स्वच्छ रखें ताकि संक्रमण का खतरा कम हो।
डॉक्टरों ने एक सख्त चेतावनी यह भी दी है कि यदि बच्चों में सर्दी, खांसी या बुखार के लक्षण दिखें, तो उन्हें नजरअंदाज न करें। सबसे जरूरी बात यह है कि किसी भी दवा का सेवन बिना डॉक्टर की सलाह के न करें, क्योंकि गलत दवा बच्चों की सेहत के लिए जोखिम भरी हो सकती है। समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेना ही इस मौसम में बचाव का सबसे सही तरीका है।