इस्लाम अपनाने वालों को नहीं मिलेगा पिछड़ा वर्ग आरक्षण, जगद्गुरु सतीशাচার্য ने SC के फैसले को बताया 'वरदान'

देश के जाने-माने आध्यात्मिक गुरु जगद्गुरु सतीशাচার্য ने सुप्रीम कोर्ट के उस अहम फैसले का जोरदार स्वागत किया है, जिसमें कहा गया है कि इस्लाम धर्म अपनाने वाले व्यक्ति पिछड़ा वर्ग (BC) आरक्षण के लाभ पाने के हकदार नहीं होंगे। उन्होंने इस फैसले को भारत और यहाँ के नागरिकों के लिए एक बड़ा 'वरदान' करार दिया है।
जगद्गुरु सतीशাচার্য ने एक वीडियो संदेश के जरिए अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि धर्म पूरी तरह से आस्था का विषय है, जबकि आरक्षण का निर्धारण संविधान के नियमों के आधार पर होता है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस फैसले के बाद धार्मिक धर्मांतरण की घटनाओं में काफी कमी आएगी। उनके अनुसार, यह निर्णय 'विकसित भारत 2047' की नीति के अनुरूप है और यह बदलाव देश के हित में है।
संविधान और आस्था के बीच अंतर
सतीशাচার্য ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि इस तरह की सोच बहुत पहले आ जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा, "एक जगद्गुरु होने के नाते मेरा यह कर्तव्य है कि मैं अपने देशवासियों के हित की बात करूँ। जो फैसला देश और जनता के सर्वोत्तम हित में हो, उसका स्वागत किया जाना चाहिए।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हिंदू सामाजिक व्यवस्था को छोड़कर गैर-हिंदू व्यवस्था में जाने वाले लोग केवल अपनी पुरानी सामाजिक स्थिति के आधार पर आरक्षण का दावा नहीं कर सकते।
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के एक फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने सरकार के उस निर्णय को रद्द कर दिया था, जिसमें मुस्लिम धर्म अपनाने वाले सात पिछड़ा वर्ग समुदायों को आरक्षण का लाभ देने की बात कही गई थी।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की बेंच ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति हिंदू सामाजिक व्यवस्था से निकलकर गैर-हिंदू व्यवस्था में जाता है, तो वह संविधान के अनुच्छेद 16(4) के तहत केवल धर्मांतरण से पहले की सामाजिक पिछड़न के आधार पर सकारात्मक कार्रवाई (Affirmative Action) का दावा नहीं कर सकता। अदालत ने तमिलनाडु सरकार की याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।