संस्कृति संसद 2026: वाराणसी में जुटेंगे देश भर के संत और विद्वान, नई पीढ़ी से जुड़ेंगे संस्कार

धर्म और संस्कृति की नगरी वाराणसी एक बार फिर एक बड़े वैचारिक संगम की तैयारी कर रही है। आगामी 3 से 5 नवंबर तक शहर के रुद्राक्ष इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर में संस्कृति संसद 2026 का आयोजन किया जाएगा। इस भव्य आयोजन का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और सामाजिक मूल्यों पर राष्ट्रीय स्तर की चर्चा करना और इन्हें नई पीढ़ी के साथ जोड़ना है।
इस कार्यक्रम का आयोजन गंगा महासभा द्वारा किया जा रहा है, जिसे अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और श्री काशी विद्वत परिषद का मार्गदर्शन प्राप्त है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस आयोजन में देश के कोने-कोने से लगभग 3,000 संत शिरकत करेंगे। इसके अलावा इसमें वैज्ञानिक, कलाकार, विशेषज्ञ और बड़ी संख्या में युवा भी शामिल होंगे।
युवाओं के लिए 'जेन जेड' कॉन्क्लेव और सांस्कृतिक उत्सव
संस्कृति संसद केवल चर्चाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें युवाओं को अपनी बात रखने के लिए एक बड़ा मंच दिया जाएगा। कार्यक्रम की खास बातें इस प्रकार हैं:
- जेन जेड (Gen Z) कॉन्क्लेव: यहाँ युवा पीढ़ी अपने विचार भाषणों, पैनल चर्चाओं और प्रश्न-उत्तर सत्रों के जरिए रखेगी। खास बात यह है कि इस कॉन्क्लेव में 90 प्रतिशत वक्ता युवा होंगे और केवल 10 प्रतिशत विशेषज्ञ रहेंगे।
- मुख्य सत्र: सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक मुख्य ऑडिटोरियम में संत, विद्वान और वैज्ञानिक विभिन्न विषयों पर मंथन करेंगे।
- संस्कृति उत्सव: शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक युवा कलाकारों द्वारा राष्ट्रीय और धार्मिक मूल्यों पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
- कला प्रदर्शनी: शिंजो आबे आर्ट गैलरी में "उत्तर प्रदेश, राम, कृष्ण और शिव की पवित्र भूमि: विरासत, संरक्षण और संवर्धन" थीम पर अंतरराष्ट्रीय पेंटिंग और फोटोग्राफी प्रदर्शनी आयोजित होगी।
इसके साथ ही बच्चों के लिए पेंटिंग और रंगोली प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाएगा, ताकि छोटी उम्र से ही बच्चों को अपनी विरासत से जोड़ा जा सके। कुल छह प्रमुख कार्यक्रमों के माध्यम से इस संवाद को आगे बढ़ाया जाएगा, जिससे परंपरा और आधुनिकता के बीच एक सेतु बनाया जा सके।