आरक्षण नहीं मिला तो खोलेंगे 'दूसरा दरवाजा', संजय निषाद ने भाजपा को दिया अल्टीमेटम

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सामने एक सख्त शर्त रख दी है। दिल्ली में आयोजित 'संवैधानिक सुरक्षा अधिकार सम्मेलन' के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि निषाद समुदाय को आरक्षण नहीं मिला, तो उनकी पार्टी राजनीतिक विकल्पों की तलाश करने के लिए स्वतंत्र होगी।
संजय निषाद ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर सरकार मछुआरा समुदाय के आरक्षण अधिकारों को पूरा करने में विफल रहती है, तो वे "दूसरे दरवाजे" की ओर रुख कर सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि यदि उनकी उम्मीदें नजरअंदाज की गईं, तो भाजपा को "धोखे" का सामना करना पड़ सकता है।
2027 चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक तपिश
अपनी पार्टी के सफर पर चर्चा करते हुए निषाद ने कहा कि 2013 से 2026 तक के पिछले 13 साल उनके लिए अभूतपूर्व सफलता के रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी अब केवल 'नाव' का प्रतिनिधित्व करने वाली छोटी इकाई नहीं, बल्कि चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाने वाली ताकत बन चुकी है।
गठबंधन की बात करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा और समाजवादी पार्टी, दोनों ही उनके साथ संबंध बनाए रखने में रुचि रखते हैं, लेकिन भविष्य में किसी भी पार्टी का समर्थन पूरी तरह से आरक्षण के मुद्दे के समाधान पर निर्भर करेगा। इसी दौरान उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव को गोरखपुर से चुनाव लड़ने की चुनौती भी दे डाली।
गौरतलब है कि 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी के मद्देनजर निषाद पार्टी काफी सक्रिय है। मार्च 2026 में ही पार्टी ने रैलियों की एक श्रृंखला की घोषणा की थी। हालांकि, संजय निषाद ने पहले एक पॉडकास्ट में यह दावा किया था कि 2027 में भाजपा सत्ता में रहेगी और एनडीए पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ेगा, लेकिन अब उनका रुख आरक्षण के मुद्दे पर काफी कड़ा नजर आ रहा है।
संजय निषाद ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी अपने सहयोगियों के प्रति प्रतिबद्ध है, बशर्ते वे सहयोगी भी उनके समुदाय के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करें।