आरक्षण की मांग पर भिड़े संजय निषाद, विपक्ष ने बताया 'सियासी स्टंट'
यूपी कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने आरक्षण मुद्दे पर भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोला, जिसके बाद विपक्ष ने उन्हें 'धोखेबाज' करार दिया है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद ने निषाद समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर अपनी ही सहयोगी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस कदम ने प्रदेश के सियासी गलियारों में तनाव पैदा कर दिया है और अब विपक्षी दल उन पर तीखे हमले कर रहे हैं।
डॉ. निषाद के इस रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए ओबीसी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष काली शंकर ने उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। काली शंकर ने संजय निषाद को 'धोखेबाज' बताते हुए कहा कि वह निषाद समुदाय का इस्तेमाल केवल अपने परिवार के सदस्यों को विधायक, सांसद और मंत्री बनवाने के लिए करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी चुनाव नजदीक आते हैं, डॉ. निषाद इस तरह के 'चुनावी स्टंट' करते हैं ताकि अपनी राजनीतिक जमीन बचा सकें।
परिवारवाद और पार्टी बदलने के आरोप
विपक्ष का दावा है कि संजय निषाद का इतिहास राजनीतिक विश्वासघात से भरा रहा है और उन्होंने भाजपा के साथ-साथ समाजवादी पार्टी और अन्य समूहों को भी धोखा दिया है। काली शंकर ने यह भी आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति (SC) आरक्षण दिलाने के नाम पर उन्होंने समुदाय के साथ धोखाधड़ी की है। उन्होंने कहा कि अब निषाद समुदाय उनकी इन चालों को समझ चुका है और आगामी विधानसभा चुनावों में उन्हें सबक सिखाएगा।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि डॉ. निषाद की यह नाराजगी केवल आरक्षण के लिए नहीं, बल्कि घटते प्रभाव के कारण है। आरोप लगाया गया है कि भाजपा द्वारा पांच सीटों पर चर्चा के बाद ही उनके सुर बदले हैं। साथ ही, यह दावा भी किया गया है कि संजय निषाद वर्तमान में समाजवादी पार्टी के बड़े नेताओं के संपर्क में हैं और अगले चुनाव से पहले पाला बदल सकते हैं।