संजय निषाद की बड़ी मांग: मछुआरा समुदाय को मिले अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा

Sushant Singh21 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के मत्स्य मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने अपने समुदाय के हक की लड़ाई को तेज कर दिया है। दिल्ली में एक संबोधन के दौरान उन्होंने पुरजोर तरीके से मांग की है कि मछुआरा समुदाय को अनुसूचित जाति (SC) की श्रेणी में शामिल किया जाए। संजय निषाद का कहना है कि यह उनके समुदाय का संवैधानिक अधिकार है और अब समय आ गया है कि उन्हें वह दर्जा मिले जिसके वे हकदार हैं।

अपने संबोधन में संजय निषाद ने समुदाय के गौरवशाली और संघर्षपूर्ण इतिहास का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि मछुआरा समुदाय के पूर्वजों ने सदियों पहले अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। उन्होंने साल 1710 में तिलका मांझी के विद्रोह और उसके बाद सिद्धो मांझी के संघर्षों को याद दिलाया। साथ ही, उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का उदाहरण देते हुए कहा कि मांझी समुदाय ने देश को बड़ी हस्तियां दी हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर समुदाय आज भी उपेक्षित है।

सरकारी मदद पर निर्भरता और आरक्षण पर सवाल

संजय निषाद ने वर्तमान व्यवस्था पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि केवल मुफ्त अनाज के भरोसे कोई समाज तरक्की नहीं कर सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर लोग कब तक 5 किलो अनाज की सरकारी मदद के सहारे अपना जीवन गुजारेंगे? उन्होंने आरोप लगाया कि मछुआरा समुदाय सदियों से शोषण का शिकार रहा है और आज भी इस समाज का एक बड़ा हिस्सा भूमिहीन है।

आरक्षण के मुद्दे पर बात करते हुए उन्होंने सोशल जस्टिस कमेटी की रिपोर्ट का हवाला दिया। निषाद ने सवाल किया कि 27 प्रतिशत ओबीसी (OBC) कोटे में दूध बेचने वालों और चमड़ा कामगारों जैसे समूहों को तो प्रतिनिधित्व मिला हुआ है, लेकिन मछुआरा समुदाय इस दौड़ में कहां खड़ा है? उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाले संवैधानिक प्रावधान उनके समुदाय के लिए विफल रहे हैं।

संजय निषाद ने खुद को मछुआरा समुदाय की आवाज बताते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से यह औपचारिक मांग की है कि इस जाति को अनुसूचित जाति के रूप में वर्गीकृत किया जाए, ताकि समुदाय को वास्तविक सामाजिक और आर्थिक न्याय मिल सके।

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