लखनऊ: मतदाता सूची संशोधन में धांधली का आरोप, समाजवादी अधिवक्ताओं ने किया जोरदार प्रदर्शन

Shubham Singh16 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
लखनऊ: मतदाता सूची संशोधन में धांधली का आरोप, समाजवादी अधिवक्ताओं ने किया जोरदार प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में चुनावी तैयारियों के बीच सियासी पारा चढ़ गया है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर समाजवादी पार्टी की कानूनी शाखा, समाजवादी अधिवक्ता सभा ने मोर्चा खोल दिया है। 16 अक्टूबर 2026 को अधिवक्ताओं ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के गेट नंबर 6 पर एकत्रित होकर शांतिपूर्ण विरोध मार्च निकाला और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

प्रदर्शनकारियों का सीधा निशाना मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार रहे। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के संशोधन के दौरान बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी और गड़बड़ी की गई है। उनका दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है और जानबूझकर मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसे विपक्षी दल लंबे समय से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की अपील कर रहे हैं।

वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर छिड़ा विवाद

इस विवाद की जड़ में उत्तर प्रदेश में मतदाताओं की संख्या में आई भारी कमी है। आंकड़ों का हवाला देते हुए आलोचकों का कहना है कि राज्य में लगभग 2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह एक नियमित प्रक्रिया है, जिसके तहत मृत, पलायन कर चुके या अपात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं।

हैरानी की बात यह है कि चुनाव आयोग के भीतर भी मतभेद की खबरें आ रही हैं। बताया जा रहा है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनावी डेटा के प्रबंधन को लेकर अपनी आपत्तियां जताई थीं।

यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ जब सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे विपक्षी नेताओं, जिनमें सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी शामिल हैं, को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिशें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। दूसरी ओर, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इन प्रदर्शनों की कड़ी निंदा करते हुए विपक्ष पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को अस्थिर करने का आरोप लगाया है।

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