मुरादाबाद: राकेश टिकैत ने महापंचायत में भरी हुंकार, पुरानी दरों पर जमीन अधिग्रहण का किया विरोध

राकेश टिकैत ने मुरादाबाद की महापंचायत में पुरानी दरों पर जमीन अधिग्रहण का विरोध किया और गन्ने का दाम 600 रुपये करने की मांग उठाई।

Sushant Singh28 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
मुरादाबाद: राकेश टिकैत ने महापंचायत में भरी हुंकार, पुरानी दरों पर जमीन अधिग्रहण का किया विरोध

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद स्थित अगवानपुर में बुधवार को किसानों का एक बड़ा जमावड़ा देखने को मिला। भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने यहाँ आयोजित महापंचायत को संबोधित करते हुए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने हिस्सा लिया, जिनका नेतृत्व बीकेयू के मुरादाबाद जिला अध्यक्ष घनेंद्र शर्मा ने किया। महापंचायत का मुख्य उद्देश्य कृषि नीतियों और जमीन के अधिकारों को लेकर किसानों की शिकायतों को पुरजोर तरीके से उठाना था।

सभा को संबोधित करते हुए राकेश टिकैत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसान अब अपनी जमीन को पुरानी दरों पर नहीं जाने देंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर 2013 की सर्कल रेट के आधार पर जमीन का अधिग्रहण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। टिकैत ने मांग की कि किसानों की जमीन लेने के बदले उन्हें वर्तमान बाजार दर के हिसाब से मुआवजा दिया जाना चाहिए, क्योंकि पुरानी दरों का उपयोग करना किसान समुदाय के साथ सरासर अन्याय है।

बिजली निजीकरण और गन्ने के दाम पर सरकार को घेरा

जमीन अधिग्रहण के अलावा, राकेश टिकैत ने बिजली क्षेत्र के निजीकरण और स्मार्ट मीटर लगाए जाने जैसे गंभीर मुद्दों पर भी अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए गन्ने का खरीद मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित करने की मांग उठाई।

यह महापंचायत टिकैत के उस व्यापक दौरे का हिस्सा थी, जो उन्होंने 7 अक्टूबर से 28 अक्टूबर 2026 के बीच कई राज्यों में किसान-मजदूर महापंचायतों के रूप में आयोजित की थी। टिकैत ने अपनी मांगों को प्रयागराज की 'किसान क्रांति महापंचायत' में रखे गए 12 सूत्रीय चार्टर से जोड़ा, जिसमें विंध्य एक्सप्रेसवे और रिंग रोड परियोजनाओं के लिए उचित मुआवजे के साथ-साथ धान की खरीद एमएसपी (MSP) पर करने और फसल नुकसान के लिए बेहतर मुआवजे की मांग शामिल है।

सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन कृषि समुदाय की जरूरतों को नजरअंदाज कर रहा है और संवैधानिक मानदंडों की अनदेखी की जा रही है। वहीं, राहुल गांधी द्वारा नवंबर में प्रस्तावित रैली पर टिप्पणी करते हुए टिकैत ने कहा कि यदि विपक्ष ने ऐसे प्रयास पहले किए होते, तो कई समस्याओं का समाधान बहुत पहले हो गया होता। उन्होंने सरकार को नसीहत दी कि वह राजनीतिक रैलियों के बजाय धरातल पर ठोस कदम उठाए ताकि किसानों की दुर्दशा को दूर किया जा सके।

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