लखनऊ में गरजे राकेश टिकैत: किसान मजदूर महापंचायत में गन्ने का दाम ₹600 करने की मांग
राकेश टिकैत के नेतृत्व में लखनऊ में किसान मजदूर महापंचायत हुई। किसानों ने गन्ने की कीमत ₹600 करने और MSP की कानूनी गारंटी की मांग की है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में किसानों का हुजूम उमड़ पड़ा है। भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के नेतृत्व में आयोजित किसान मजदूर महापंचायत लखनऊ में प्रदेशभर से आए किसानों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यह विरोध प्रदर्शन उस समय और भी गरमा गया जब पिछले दिन प्रशासन और किसान नेताओं के बीच तीखी झड़प हुई।
घटना 22 अक्टूबर की शाम की है, जब राकेश टिकैत और उनके साथी नेताओं को गन्ना संस्थान में प्रवेश करने से रोक दिया गया था। इस पर नाराज़ होकर किसान नेताओं ने रात भर संस्थान के बाहर प्रदर्शन किया। हालात तब तनावपूर्ण हो गए जब टिकैत ने बंद गेटों को तोड़ने की चेतावनी दे दी, जिसके बाद करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद अधिकारियों ने उन्हें अंदर जाने की अनुमति दी।
गन्ने की कीमत और MSP पर सरकार को घेरा
इस महापंचायत का मुख्य केंद्र गन्ने की कीमतों में बढ़ोतरी करना है। किसानों की स्पष्ट मांग है कि राज्य में गन्ने का दाम बढ़ाकर ₹600 प्रति क्विंटल से अधिक किया जाए। आपको बता दें कि 2025-26 के क्रशिंग सीजन में शुरुआती किस्म के गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (SAP) ₹400 प्रति क्विंटल था, जबकि 2026-27 की दरें अभी तक घोषित नहीं हुई हैं।
गन्ने के दाम के अलावा, किसानों ने अपनी अन्य प्रमुख मांगों की एक लंबी सूची सरकार के सामने रखी है, जिनमें शामिल हैं:
- पिछले सीजन के गन्ने के बकाया भुगतान का तुरंत निपटारा।
- भूमि अधिग्रहण का मुआवजा 2013 की दरों के बजाय वर्तमान सर्कल रेट के आधार पर मिले।
- न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी दी जाए।
- स्मार्ट बिजली मीटर लगाने के फैसले पर पुनर्विचार हो।
- हालिया बारिश से फसलों को हुए नुकसान का उचित मुआवजा मिले।
धान की खरीद को लेकर भी राकेश टिकैत ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि सरकार ने 2026-27 के लिए केंद्रीय MSP दरों (₹2,441 और ₹2,461) पर खरीद का लक्ष्य रखा है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। टिकैत का दावा है कि किसानों को उनकी फसल MSP से लगभग ₹1,000 प्रति क्विंटल कम दाम पर बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
राकेश टिकैत ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनकी इन 22 लंबित मांगों पर जल्द विचार नहीं किया, तो यह आंदोलन केवल लखनऊ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे प्रदेश में एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले लेगा।