अमित शाह मानहानि मामला: फैसला सुनने सुल्तानपुर कोर्ट पहुंचे राहुल गांधी, एयरपोर्ट पर समर्थकों का जमावड़ा
अमित शाह के खिलाफ 2018 में दिए बयान पर मानहानि मामले में फैसला सुनाने के लिए राहुल गांधी सुल्तानपुर कोर्ट पहुंचे। जानें क्या है पूरा मामला।

कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी आज लखनऊ पहुंचे, जहां से वे सुल्तानपुर की विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट में पेश होने के लिए रवाना हुए। यह मामला साल 2018 का है, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ की गई कथित टिप्पणी को लेकर राहुल गांधी पर मानहानि का मुकदमा चल रहा था। कोर्ट में आज इस मामले पर अंतिम फैसला आने की उम्मीद है।
राहुल गांधी के लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचने पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी और उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मोना मिश्रा उनके साथ मौजूद थीं। एयरपोर्ट परिसर में बड़ी संख्या में कांग्रेस समर्थक पार्टी के झंडे और बैनर लेकर राहुल गांधी के समर्थन में खड़े नजर आए। इस मौके पर प्रमोद तिवारी ने कहा कि राहुल गांधी संविधान और अदालत का पूरा सम्मान करते हैं, इसीलिए वे आज कोर्ट में मौजूद हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि राहुल गांधी के बयानों को गलत संदर्भ में लिया गया।
क्या है पूरा मामला और कानूनी प्रक्रिया?
यह विवाद मई 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान शुरू हुआ था। बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने तत्कालीन भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बारे में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं, जिसमें उन्होंने उन्हें एक हत्या के मामले में आरोपी बताया था। इस बयान से नाराज होकर तत्कालीन जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष और भाजपा के जिला उपाध्यक्ष विजय मिश्रा ने राहुल गांधी के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी।
राहुल गांधी के बचाव पक्ष के वकील काशी प्रसाद शुक्ला ने बताया कि कोर्ट ने प्रथम दृष्टया सबूत मिलने के बाद आईपीसी की धारा 500 के तहत उन्हें तलब किया था। इस मामले में पूरी सुनवाई हुई और गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए। वकील ने यह भी स्पष्ट किया कि फैसले के बाद कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा, जिसके तहत आरोपी को ऊपरी अदालत में अपील की स्थिति में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जमानत बॉन्ड भरना होता है।
शिकायतकर्ता विजय मिश्रा ने इस मामले पर अपनी बात रखते हुए कहा कि जब राहुल गांधी ने बेंगलुरु में अमित शाह को हत्यारा कहा, तो उन्हें बहुत दुख हुआ क्योंकि वे पिछले 33 वर्षों से पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता हैं। इसी वजह से उन्होंने यह कानूनी लड़ाई लड़ी, जो पिछले 5 सालों से चल रही थी।