अयोध्या दीपोत्सव की तैयारी: रायबरेली जेल के बंदी बना रहे हजारों दीये

दीपावली का त्योहार करीब है और अयोध्या में सरयू तट पर होने वाले भव्य दीपोत्सव की तैयारियां जोरों पर हैं। इस बार की खास बात यह है कि इस उत्सव की रोशनी में रायबरेली जिला जेल के बंदियों का हुनर भी नजर आएगा। जेल के पुरुष और महिला बंदी मिलकर हजारों की संख्या में मिट्टी के दीये, बर्तन और खिलौने तैयार कर रहे हैं, जिनमें से 10 हजार से ज्यादा दीये खास तौर पर अयोध्या के दीपोत्सव के लिए भेजे जा रहे हैं।
हुनर से बदल रही है जिंदगी
जेल प्रशासन ने इस पहल के जरिए बंदियों के व्यावसायिक पुनर्वास और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा है। इस कार्य में पुरुष बंदी मिट्टी को आकार देने, उन्हें ढालने और पेंट करने का काम कर रहे हैं, जबकि महिला बंदी घास की टोकरियां और अन्य सजावटी सामान बनाने में जुटी हैं। उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए जेल प्रशासन बाहर से उच्च गुणवत्ता वाली मिट्टी मंगवा रहा है।
जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका, जेल अधीक्षक प्रभात सिंह और जेलर हिमांशु रौतेला इस पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी कर रहे हैं और बंदियों का उत्साह बढ़ा रहे हैं। जेल अधीक्षक प्रभात सिंह के मुताबिक, इस रचनात्मक पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बंदियों को उनकी मेहनत का उचित पारिश्रमिक मिले, ताकि जेल से बाहर निकलने के बाद उनके पास रोजगार का एक स्थायी जरिया हो।
इन हस्तशिल्प उत्पादों को आम जनता तक पहुंचाने के लिए जेल के गेट के बाहर एक विशेष रिटेल शॉप भी खोली गई है। यहां बिकने वाले सामान से होने वाली कमाई का एक हिस्सा मजदूरी के रूप में बंदियों को दिया जाता है। विशेषज्ञों ने इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे कौशल विकास और आर्थिक सशक्तिकरण के जरिए कैदियों के सामाजिक पुनर्वास की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।