वाराणसी: आधुनिक चुनौतियों के लिए प्राचीन ज्ञान जरूरी, डॉ प्रीति अडानी ने सिम्पोजियम में रखी बात

वाराणसी में आयोजित वर्ल्ड सिम्पोजियम में डॉ प्रीति अडानी ने बताया कि कैसे प्राचीन ज्ञान आज की आधुनिक चुनौतियों को हल करने में मददगार हो सकता है।

Shubham Singh2 November 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
वाराणसी: आधुनिक चुनौतियों के लिए प्राचीन ज्ञान जरूरी, डॉ प्रीति अडानी ने सिम्पोजियम में रखी बात

धर्म और संस्कृति की नगरी वाराणसी में सोमवार को "प्राचीन ज्ञान, आधुनिक चुनौतियां" (Ancient Wisdom for Modern Challenges) विषय पर एक वर्ल्ड सिम्पोजियम का आयोजन किया गया। इस खास मौके पर अडानी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ प्रीति अडानी ने मुख्य भाषण देते हुए एक बहुत गहरी बात कही। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्राचीन ज्ञान केवल इसलिए मूल्यवान नहीं है क्योंकि वह पुराना है, बल्कि इसकी असली कीमत तब है जब हम इसे आज की समस्याओं को सुलझाने के लिए इस्तेमाल करें।

डॉ प्रीति अडानी ने अपने संबोधन में कहा कि सभ्यता के पुराने ज्ञान को सहेजकर रखना और उसे दुख, असमानता और संघर्ष जैसी मौजूदा समस्याओं को दूर करने के लिए लागू करना समय की मांग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां ज्ञान हमें दुनिया बदलने की ताकत देता है, वहीं 'विवेक' या बुद्धिमत्ता हमें यह भरोसा दिलाती है कि हम इस बदलाव को बेहतरी के लिए कर रहे हैं।

बुद्ध, अरस्तू और कन्फ्यूशियस के विचारों का जिक्र

डॉ अडानी ने दुनिया के महान विचारकों का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे अरस्तू ने मानव समृद्धि, भगवान बुद्ध ने दुखों से मुक्ति और चीनी दार्शनिक कन्फ्यूशियस ने नैतिक जिम्मेदारी और सामाजिक सद्भाव पर जोर दिया था। उन्होंने इन सभी परंपराओं को भारत के 'वसुधैव कुटुंबकम' (पूरी दुनिया एक परिवार है) के विचार से जोड़ा और कहा कि इसी सोच से सतत विकास (Sustainable Development) को आगे बढ़ाया जा सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने वाराणसी को अपनी संसदीय सीट चुना, जिसके कारण यह शहर आज विभिन्न संस्कृतियों के मिलन स्थल और भारत की बढ़ती वैश्विक उपस्थिति का प्रतीक बन गया है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे पूर्व जापानी पीएम शिंजो आबे और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी इस पवित्र शहर की दिव्यता को महसूस किया है।

सामुदायिक विकास पर बात करते हुए डॉ अडानी ने 'सेवा' के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि सच्ची सेवा समुदायों की बात सुनने और उन्हें अपना भविष्य खुद संवारने के काबिल बनाने में है। उन्होंने 'भारत नॉलेज ग्राफ' के बारे में भी बताया, जिसके लिए अडानी ग्रुप ने 10 मिलियन डॉलर की प्रतिबद्धता जताई है, ताकि भारत के सभ्यतागत ज्ञान को रिसर्च के लिए सुलभ बनाया जा सके।

इस कार्यक्रम में कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जेफरी डी. सैक्स ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने वैश्विक आर्थिक शक्ति के बदलते संतुलन पर चर्चा करते हुए बताया कि कैसे भारत की वैश्विक हिस्सेदारी 2000 में 5.2% थी, जो 2050 तक 13.1% और 2100 तक 15.1% तक पहुंचने का अनुमान है। उन्होंने अडानी ग्रुप और फाउंडेशन द्वारा सतत विकास के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की और कहा कि पारिवारिक नाम से चलने वाले व्यवसायों की समाज के प्रति जिम्मेदारी और भी अधिक होती है।

Share:

Comments

Leave a comment