14 दिन बाद केली कुंज आश्रम लौटे प्रेमानंद महाराज, जांच और विवादों के बीच दी दर्शन

14 दिन बाद केली कुंज आश्रम लौटे प्रेमानंद महाराज, जांच और विवादों के बीच दी दर्शन

वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज 8 अक्टूबर, 2026 को करीब दो हफ्ते बाद अपने केली कुंज आश्रम पहुंचे। बेलवन आश्रम से एक काले रंग की गाड़ी में सवार होकर आए महाराज के दर्शन के लिए आश्रम के गेट पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी थी। केली कुंज पहुंचने के बाद वे अपने गुरु श्री हित गोविंद शरण महाराज के वराह घाट स्थित आश्रम भी गए। महाराज की यह वापसी ऐसे समय में हुई है जब उनके आश्रम के भीतर स्थिरता और शिष्यों के बीच मतभेदों को लेकर काफी चर्चाएं चल रही हैं।

मौत, विवाद और सुरक्षा की मांग

प्रेमानंद महाराज की यह वापसी कई गंभीर सवालों और जांचों के बीच हुई है। दरअसल, 25 सितंबर, 2026 को साधक रसिक दुलारी शरण की चौथी मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर सात चोटों का जिक्र है, जिसमें निजी अंगों पर गंभीर चोटें भी शामिल हैं। हालांकि मथुरा पुलिस सीसीटीवी फुटेज और कॉल रिकॉर्ड्स के जरिए मामले की जांच कर रही है, लेकिन अब तक औपचारिक एफआईआर (FIR) दर्ज न होने के कारण जनता में काफी नाराजगी है। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई है, जिसमें एसआईटी (SIT) या मजिस्ट्रेट जांच की मांग की गई है।

आश्रम के भीतर चल रहे तनाव को देखते हुए अब शिष्यों के लिए ड्रेस कोड के कड़े नियम लागू किए गए हैं। अब पीले अचल पहनना प्रतिबंधित है और गृहस्थ शिष्यों को साधारण कपड़े या कुर्ता-पायजामा पहनने का निर्देश दिया गया है।

इतना ही नहीं, आश्रम हाल ही में एक और विवाद में घिरे जब क्रिकेटर विराट कोहली की यात्रा से जुड़े 5 करोड़ रुपये के भुगतान के आरोप लगे। हालांकि, कोहली के प्रवक्ता ने इन दावों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि उनकी यात्राएं केवल व्यक्तिगत श्रद्धा पर आधारित हैं।

इन सबके बीच, कई धार्मिक हस्तियों ने संत प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उन्हें Z-प्लस सुरक्षा प्रदान करने की अपील की है। वहीं, कुछ परिवारों ने आश्रम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया है, जिनका दावा है कि उनके बच्चे आश्रम से जुड़ने के बाद लापता हो गए।

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