प्रयागराज के रेलवे स्टेशनों पर अब ट्रीटेड वॉटर से होगी ट्रेनों की धुलाई, NMCG ने दिए निर्देश

प्रयागराज में अब रेलवे स्टेशनों पर पानी की बर्बादी रोकने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG) ने जल निगम को निर्देश दिया है कि शहर के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से निकलने वाले ट्रीटेड वॉटर (उपचारित जल) के लिए रेट तय किए जाएं। इस योजना के तहत प्रयागराज रेलवे स्टेशन ट्रीटेड वॉटर का उपयोग ट्रेनों की धुलाई और अन्य परिचालन कार्यों के लिए करेगा, जिससे ताजे पानी की खपत में कमी आएगी।
योजना के मुताबिक, प्रयागराज जंक्शन को राजपुर STP से और सुबेदारगंज स्टेशन को कोडरा STP से उपचारित पानी की आपूर्ति की जाएगी। दोनों स्टेशनों के लिए प्रतिदिन 20-20 लाख लीटर पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इस पूरी व्यवस्था को धरातल पर उतारने के लिए बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा, जिसमें सुबेदारगंज स्टेशन तक पाइपलाइन बिछाने के लिए लगभग 23 करोड़ रुपये का बजट अनुमानित है।
यूपी सरकार की बड़ी मुहिम का हिस्सा है यह प्रोजेक्ट
यह पहल उत्तर प्रदेश सरकार की उस व्यापक नीति का हिस्सा है, जिसमें उपचारित अपशिष्ट जल के बड़े पैमाने पर पुन: उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य प्रशासन ने रेलवे, बिजली संयंत्रों और विभिन्न उद्योगों को अपने ऑपरेशनल प्लान में ट्रीटेड वॉटर को शामिल करने के निर्देश दिए हैं। प्रयागराज के साथ-साथ वाराणसी और आगरा में भी इसी तरह की रणनीतियों पर काम चल रहा है।
पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक सख्त निगरानी प्रणाली अपनाई गई है। सभी एसटीपी की निगरानी 'गंगा पल्स पोर्टल' के जरिए की जा रही है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सप्लाई किया जाने वाला पानी निर्धारित मानकों के अनुरूप है। भविष्य में बनने वाली डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट्स (DPR) में भी अब स्पष्ट रूप से उन संभावित उपयोगकर्ताओं की पहचान की जाएगी, जो इस उपचारित जल का उपयोग कर सकें।